पोस्टमार्टम रिपोर्टः कम पानी के चलते मरी डाल्फिन

Bulandshahr Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
नरौरा। गंगा नदी की डाउन स्ट्रीम में मिले डाल्फिन के शव का बृहस्पतिवार को वन चेतना केंद्र में पोस्टमार्टम किया गया। रिपोर्ट में मौत का कारण डाउन स्ट्रीम (कम पानी) माना गया। जबकि शव एक सप्ताह से ज्यादा पुराना माना गया है। ऐसे में गंभीर बात यह है कि डाल्फिन अभियान और डाल्फिन का पर्यवेक्षण करने वाले वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फेडरेशन) के अमले को दस दिन बाद डाल्फिन के मरने की जानकारी हो रही। क्षेत्रीय लोगों ने डाल्फिन के संरक्षण में लगाए गए लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। डीएफओ के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन लखनऊ को डाल्फिन के मरने की सूचना दे दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव को वन चेतना केंद्र परिसर में दबा दिया गया है।
गंगा नदी की डाउन स्ट्रीम में बुधवार को गांधी घाट के सामने रेती में करीब तीन वर्षीय डाल्फिन का शव मिला था। लोगों की जानकारी पर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। वन क्षेत्राधिकारी चंद्रशेखर पंथ ने बताया कि बृहस्पतिवार को वन चेतना केंद्र नरौरा में डाल्फिन के शव का पोस्टमार्टम हुआ। शव करीब आठ से 10 दिन पुराना है। बैराज की डाउन स्ट्रीम की मुख्य पानी की धारा से अलग हो जाने पर कम पानी जाने से मौत हुई है। शव पडे़ रहने की जानकारी तक नहीं होने के सवाल पर उन्होंने उसे गंगा की धारा के दूसरी ओर होने की बात कहते हुए संसाधनों की कमी वजह बताया है।

बाकी डाल्फिन की जान बचाओ
नरौरा। गंगा नदी में डाउन स्ट्रीम से एक डाल्फिन की जान चली जाने के बाद बाकी सात की जिंदगी पर भी खतरा मंडरा सकता है। गंगा नदी की डाउन स्ट्रीम में नरौरा से कचला घाट तक के गंगा क्षेत्र में 8 डाल्फिन की मौजूदगी की बात डब्लूडब्ल्यूएफ के लोग मान चुके हैं। पानी की कमी से भी संस्था वाकिफ है। इसके बावजूद लापरवाही बरती जा रही है। राष्ट्रीय जलीय जीव डाल्फिन पर खतरों को हालांकि वन विभाग और इसकी संरक्षण करने वाली संस्था डब्लूडल्लूएफ भांप रही है। फिर भी अधिकृत तौर पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। मौजूदा समय में गंगा के जलस्तर को लेकर जानकारी रखने वालों का कहना है कि अब बरसात तक लगातार पानी की कमी गंगा नदी में होती रहेगी। निर्भर इस पर करेगा कि जल स्तर कितना तेजी से गिरेगा। अगर जल स्तर का ग्राफ तेजी से गिरता है तब डाल्फिन के लिए खतरा बढ़ना तय है। सांस लेने के लिए डाल्फिन की आदत है कि वह हर पांच मिनट में पानी से ऊंची छलांग लगाती है। अगर कम पानी होता है तो छलांग लगाने के बाद नीचे जमीन से टकराएगी जो उसकी जिंदगी के लिए घातक है।
डब्लूडब्लएफ नरौरा फील्ड कार्यालय प्रभारी विवेकशील सागर का कहना है कि डाल्फिन की मौत होने की जानकारी मिली है। गंगा की डाउन स्ट्रीम में वन विभाग और प्रशासन के साथ सर्वे कर बाकी डाल्फिन की स्थिति का अध्ययन करेंगे। आवश्यकता होने पर वन विभाग के साथ उन्हें गंगा की अप स्ट्रीम में ट्रांसप्लंाट करने की योजना बनाई जाएगी।

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