भूखी बच्चियां, बेबस मां

Bulandshahr Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
गरीबी और कर्ज से तंग सुनील ने छोड़ी दुनिया तो पत्नी पर टूटा विपत्तियों का पहाड़
चौथी बेटी पैदा होने के बाद पति ने ट्रेन से कटकर दे दी थी जान
बुलंदशहर। गरीबी और सूदखोरों से तंग सुनील ने तो जान दे दी, लेकिन पीछे पत्नी और चार मासूम बेटियों के लिए छोड़ गया मुफलिसी। चौथी बेटी के जन्मते ही पति के जान देने से राजेश पर विपत्तियों का पहाड़ आन पड़ा है। पति काे खोने का गम है तो चार बेटियों के पालन-पोषण की चिंता। चार मासूम बेटियां इधर-उधर भटकने को विवश हैं। लेकिन न तो इस गरीब परिवार का दु:ख सुनने कोई प्रशासन का अफसर आया और न ही वोट से मतलब रखने वाले जनप्रतिनिधि। सुनील के मौत के चार दिन हो गए हैं। उसके घर में चूल्हा तक नहीं जला है।
कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव अल्लीपुर गिझौरी निवासी सुनील के तीन बेटियां थीं। गरीबी और कर्ज के कारण तीनों बच्चियों का पालन पोषण करना सुनील के लिए मुश्किल हो रहा था। बुधवार को चौथी पुत्री के जन्म लेने के बाद सुनील ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। मृतक की पत्नी राजेश ने गरीबी और सूदखोरों के दबाव के चलते पति के खुदकुशी करने की बात कही थी। सुनील की मौत के बाद उसके परिवार के लिए रोटी के भी लाले पड़ गए हैं। सुनील की पत्नी राजेश जच्चा हालत में है और अभी उसे खुद देखभाल की जरूरत है। इसके चलते मासूम बेटियां निशा (7 साल) नेहा, (5 साल) निशा (साल) रोटी के लिए इधर-उधर भटक रही हैं। आर्थिक मदद तो दूर अफसरों ने सुनील की मौत की जांच तक कराने की भी जरूरत नहीं समझी है। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो रहा है।
कहां गए वोट लेने वाले नेता
गरीब परिवार की विपत्तियों से प्रशासनिक अफसर बेखबर हैं तो वहीं वोट लेने वाले नेता भी मदद को आगे नहीं आ रहे हैं। गरीबों-बेसहारों के उत्थान का राग अलापने वाले सामाजिक संगठन तक चुप्पी साधे बैठे हैं।
आर्थिक मदद देंगे
गरीब परिवार के साथ दुखद घटना का समाचार मुझे मिल गया है। मृतक सुनील के घर जाकर परिवार की मदद के लिए उचित कदम उठाएंगे।
- मुंशी लाल गौतम, पूर्व विधायक
अफसर की सुनिए
मृतक की पत्नी को राष्ट्रीय परिवारिक मदद योजना के अंतर्गत बीस हजार रुपये आर्थिक राशि दिलाई जाएगी, लेकिन इसके लिए उसे एक फार्म कार्यालय में जमा करना होगा। सुनील की मौत की जांच के बाद पीड़ित परिवार को मदद दे दी जाएगी। इसके अलावा उसकी बेटियों को विवाह के लिए दस-दस हजार रुपये की मदद मिल सकती है।
- इंद्रा शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी

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