कुट्टू का आटा, सेहत के लिए ‘जहर’

Bulandshahr Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
प्रदेश में कुट्टू को प्रतिबंधित करने की संस्तुति, खाद्य सुरक्षा विभाग ने शासन को भेजी शोध रिपोर्ट

बुलंदशहर। नवरात्र के व्रत के इन दिनों में यदि आप कुट्टू के आटे का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सचेत हो जाइए। यह खतरनाक साबित हो सकता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने दो साल में जिले में सौ और प्रदेश में पांच हजार लोगों पर परीक्षण के बाद इसके खतरनाक होने का खुलासा किया है। खाद्य एवं औषधि प्रसंस्करण विभाग के आयुक्त को भेजे पत्र में सूबे में कुट्टू (बकव्हीट) को प्रतिबंधित करने की वकालत की गई है। पर्यावरण में होते बदलाव के चलते कुट्टू का इस्तेमाल करने वाले लोगों में 30 फीसदी में यह हाईली एलर्जिक पाया गया है। कोरिया, जापान और यूरोप ने तो इसे पहले ही वैन कर रखा है।

यह है शोध
कोरिया जापान और अन्य देशों में हुए शोध रिपोर्ट के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी उमेश मिश्रा ने इस पर दो साल तक शोध किया। लैब रिपोर्ट में शुद्ध मिलने वाले कुट्टू आटे को क्षेत्रों में करीब सौ लोगों पर प्रयोग किया। इनको कुट्टू की अलग-अलग मात्रा खिलाकर चेकअप कराया गया। यूपी में पांच हजार और जिले में सौ लोगों पर किए गए प्रयोग में 30-35 फीसदी में इससे अत्यंत तीव्र और 40 फीसदी में सामान्य एलर्जी पाई गई। इससे बाडी में मेडिएटेड एनाफाइलैक्स (बाडी की क्रियाओं को अनियंत्रित करने वाला रसायन) पैदा होते हैं।

ऐसे करता है नुकसान
इसके प्रयोग के चार-सात घंटे के बाद एलर्जिक एक्टिविटीज होती हैं। इससे रिएक्शन जैसे लक्षण दिखते हैं। पेट में तीव्र मरोड़ के साथ दर्द, उल्टी, दस्त, मतिभ्रम (बौखलाहट व स्मृति दोष) हो जाता है। मूत्र से नियंत्रण कम होने लगता है। यहां तक कि मस्तिष्क में खून की नलियों में इसका अत्यधिक असर पड़ता है।

हो सकती है मौत
शोध में कहा गया है कि ऐसी हालत में व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। शरीर में पानी की कमी, आंतों में छेद होने, उच्च रक्तचाप, ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है।

ऐसे करें स्व:परीक्षण
कुट्टू का प्रयोग करने से पहले खाली पेट इसको थोड़ी मात्रा (20-50 ग्राम) में सेवन करके देख लें। बच्चों को इसको बिल्कुल न दें। एलर्जी होने पर इस्तेमाल से बचें।

कुट्टू के खुले आटे में बढ़ जाती है टॉक्सिटी
जब कुट्टू का आटा खाना ही घातक है तो फिर सवाल उठता है कि पैकेट बंद के खाने से नुकसान क्यों नहीं हो रहा? शोधकर्ता खाद्य सुरक्षा अधिकारी उमेश चंद मिश्रा ने बताया कि कुट्टू की टॉक्सिटी आटा बनकर खुला रखने के बाद बढ़ जाती है। यों तो कुट्टू खाने से नुकसान होता ही है, लेकिन जब इसमें नमी और फंगस संक्रमण होता है तो टॉक्सिटी में 20 गुना तक बढ़ोत्तरी हो जाती है। यही कारण है कि खुला आटा खाने वालों को परेशानी ज्यादा होती है और इसका अहसास भी जल्दी होने लगता है। जबकि साबुत दाना लेकर घर पर सफाई से पिसवाने और फंगस व नमी से बचाकर रखने पर इतनी परेशानी नहीं होती। ऐसा ही विचार डा. एसके गर्ग का है। उन्होंने बताया कि खुले आटे में टॉक्सिटी ज्यादा होने के कारण लोगों पर जल्दी असर होता है, जबकि पैकिंग और साबुत लेकर घर पर पिसवाने वालों पर कम।

विशेषज्ञों की राय
शोधकर्ता व खाद्य सुरक्षा अधिकारी उमेश चंद मिश्रा का कहना है कि बकव्हीट का प्रयोग जानलेवा हो सकता है। यह ह्यूमेन यूज के लिए नहीं है, फास्ट में तो कतई नहीं। दो साल पहले दो सौ लोगों के बीमार होने के बाद यूपी के एडमास्‍फियर पर इसकी रिसर्च की गई। इसमें घातक रिजल्ट मिले हैं। यूपी गर्वनमेंट इसकी बिक्री प्रतिबंधित करने की मांग की है।
बुलंदशहर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा.विवेक राज का कहना है कि कई खाद्यान्न समय और वातावरण के अनुसार अपना प्रभाव बदलते रहते हैं। कुट्टू भी ऐसा ही है। इसको मानव प्रयोग के लिए सेफ नहीं माना जाता है। हेल्थ एंड एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से इसके प्रयोग को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।
वरिष्ठ फिजीशियन डा. एसके गर्ग का कहना है कि कुट्टू के प्रयोग से लोगों की सेहत बिगड़ रही है। कई लोग जहां बीमार हो रहे हैं, वहीं पर ज्यादातर असामान्य महसूस करते हैं। लोगों को इसका प्रयोग न करने की सलाह दी गई है।

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