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50 पैसे किलो लौकी, मगर खरीददार नहीं

Bulandshahr Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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बुलंदशहर। लौकी की बंपर पैदावार के कारण जनपद के करीब 70 हजार किसान बर्बादी के कगार पर आ गए हैं। हजारों रुपये की लागत से तैयार फसल का मूल्य भी निकलना मुश्किल हो गया है। बाजार में लौकी 50-70 पैसे किलो बिक रही है। जबकि बाजार तक ले जाने और खेतों से कलेक्ट करने की लागत ही इससे ज्यादा पड़ती है। ऐसे में ज्यादातर किसानों ने लौकी काटकर खेतों के बाहर ढेर लगा दिया है। कई किसान पशुओं को लौकी खिला रहे हैं। फिलहाल मंडल में ऐसे किसानों की तादात करीब तीन लाख है।
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कृषि मैनेजमेंट न अपनाने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। लौकी को रुपयों की फसल कहा जाता है। कम लागत और सामान्य देखभाल में किसानों को मोटा मुनाफा होता है। जनपद के किसानों ने इस साल 150 हेक्टेयर में लौकी की बुवाई की। बारिश ने भी साथ दिया। अच्छी पैदावार से अब किसानों के सामने मुश्किल आ गई है। मंडी में लौकी कोई खरीदने को तैयार नहीं है।


लागत 30-35 हजार प्रति एकड़
लौकी की बुवाई से लेकर खाद और देखभाल तक किसानों का 30-35 हजार रुपये प्रति एकड़ का खर्चा आया है, जबकि पैदावार मात्र चार-पांच हजार रुपये एकड़ की निकल रही है।

क्राप मैनेजमेंट नहीं
कृषि विभाग की यह जिम्मेदारी होती है कि वह क्राप मैनेजमेंट कराए। किसानों को किसी एक फसल को अंधाधुंध न बोने दे। पैदावार के हिसाब से बिक्री की व्यवस्था कराए। लेकिन कृषि विभाग के अफसरों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन ही नहीं किया।

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