जेल की सलाखों से चरनदेई की रिहाई

Bulandshahr Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
बीमार वृद्धा की हुई तीन वर्ष की सजा माफ
बुलंदशहर। तीन साल से दहेज हत्या के मामले में सजा काट रही 90 साल की चरनदेई शनिवार को जेल की सलाखों से आजाद हो गई। मेडिकल बोर्ड, डीएम बुलंदशहर और जेल अधीक्षक की संस्तुति के बाद शासन के आदेश पर चरन देई को उसके पुत्र हरवंश के सुपुर्द कर दिया गया। यह लम्हा इतिहास के पन्नों की सुर्खियों में दर्ज हो गया।
औरंगाबाद के गांव रतनपुर निवासी चरन देई के पुत्र श्रीकृष्ण की बहू की वर्ष 2007 में मौत हो गई थी। वर्ष 2009 में कोर्ट ने चरन देई को उसकी बहू की हत्या के आरोप में छह वर्ष की सजा सुनाई। उस दौरान चरन देई वृद्धावस्था के कारण शारीरिक रुप से काफी कमजोर थी। जुलाई 2012 मेें जेल अधीक्षक वीके सिंह की तैनाती हुई और उन्होंने चरन देई की हालत देखी। वीके सिंह ने चरन देई का मेडिकल बोर्ड बनवाकर डीएम-एसएसपी से संतुति कराकर वृद्धा को रिहा कराने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी। इसी बीच मंत्री राजा भैया ने जेल का निरीक्षण किया, तो वीके सिंह ने चरन देई की स्थिति की जानकारी दी और उन्होंने जल्द चरन देई की रिहाई का आदेश भेजने का आश्वासन दिया। 10 सितंबर को शासन ने शेष तीन वर्ष की सजा माफ कर चरन देई की रिहाई का आदेश दे दिया और वह शनिवार को वह घड़ी भी आ गई, जब सारी औपचारिकताएं पूरी कर चरनदेई को रिहा कर दिया गया। चरन देई का बड़ा पुत्र हरवंश जेल पहुंचा और अपनी वृद्धा मां को गोद में उठाकर बाहर निकला।

सजायाफ्ता कैदी को ही मिल सकती है राहत
जेल अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि मर्सी कानून का लाभ केवल सजायाफ्ता कैदी को ही मिलता है। न्यायालय में विचाराधीन मामले के आरोपियों को जेल से रिहा नहीं कराया जा सकता। बुलंदशहर जेल से 70 वर्ष अधिक आयु का चरन देई के अलावा कोई सजायाफ्ता कैदी नहीं था।

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