माफियाओं के पेट में जा रहीं बेशकीमती जमीनें

Bulandshahr Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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d अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। कानून के निशाने पर आने के बाद मोती गोयल तो सुर्खियोें मेें है मगर बुलंदशहर जिले में सरकारी जमीनें हथियाने में लगे दूसरे भू-माफियाओं पर शासन-प्रशासन की नजर अब भी नहीं है। करोड़ों-अरबों की सरकारी जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं और पूरा अमला सो रहा है। जिले में कितनी ही जगहों पर ग्राम समाज और नजूल की जमीनों की बंदरबांट हो चुकी है। नगर क्षेत्र में रायफल क्लब 0.1770 हेक्टयर जमीन धीरे-धीरे भू माफियाओं ने बेच डाली है। नुमाइश की खाली पड़ी जमीन पर भी अवैध कब्जे आलीशान बंगले खड़े कर दिए गए हैं। सदर तहसील के ठीक सामने ग्राम सभा की जमीन को भी इसी तरह से बेचने की तैयारी है।
दरअसल, भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने और कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद सही पैरवी न होने से सरकारी संपत्तियों अवैध कब्जों के जाल से नहीं निकल पा रहीं। बुलंदशहर में 1927 के बाद से सरकारी संपत्तियों का सर्वे तक नहीं हुआ है। नगर पालिका और राजकीय संपत्तियां कहां हैं, इसका रिकॉर्ड न प्रशासन के पास है और न ही पालिकाओं को सुध है।
संपत्ति विभाग की मानें तो बुलंदशहर नगर पालिका की करीब 67 हेक्टेयर जमीन शहर में है। 358 पट्टे हैं इनमें से 325 राजकीय नजूल के शेष पालिका के हैं। तुलसी मार्केट, सुभाष, डिप्टी गंज, लालतालाब, खुर्जा अड्डा, वाटर वर्क्स, मामन चौकी, अनूपशहर चौराहा, सरायधारी, देवीपुरा स्कूल और कचहरी रोड मिलाकर 250 दुकानें हैं। इनमें से भी 131 राजकीय नजूल की है। शहर में ओपेन लैंड भी हैं। 67 हेक्टेयर जमीन में से आधे से ज्यादा भूमि पर भू माफियाओं का कब्जा हो चुका है। भूड स्थित तालाब की जमीन की प्लाटिंग कर उन्हें भू माफियाओं ने मोटे दामों पर बेच डाला।
नगर पालिका अभिलेखों में भूड़ की जमीन आज भी तालाब के नाम पर दर्ज है। खुर्जा के मुडाखेडा रोड पर कई हेक्टेयर करोड़ रुपये की जमीन पर भू माफियाओं ने मिलीभगत कर प्लाटिंग कर बेच डाली। शिकायतों के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी तरह कब्रिस्तान और तालाबों की जमीनों पर भी अवैध कब्जा होकर जमीनों को बेचा जा चुका है।

सिकंदराबाद में उजागर हुआ था घोटाला
अफसरों और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से चल रहा जमीन घोटाले का खुलासा शासन स्तर से हुई जांच में वर्ष 2005 में हुआ था। उस समय 89 पट्टों की 10 लाख वर्ग मीटर जमीन का घोटाले सामने आया था। जमीनें कब्जियाने के मामले में मोती गोयल का नाम इसके बाद से ही चर्चा में आना शुरू हुआ था। जमीन की कीमत उस समय छह सौ करोड़ रुपये बताई गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इस मामले में सीबीआई ने मोती गोयल, रोहताश शर्मा, देवेंद्र सिंह, चरन सिंह, जितेंद्र माहेश्वरी, रजनी गोयल, वंदना गोयल, रामलखन सिंह और शाकुंत पाल सिंह के खिलाफ 22 दिसंबर 2006 को चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई गाजियाबाद के विशेष सीबीआई न्यायाधीश की कोर्ट में चल रही है। इसके अलावा गाजियाबाद के गांव प्रहलाद गढ़ी 66760 वर्ग मीटर जमीन पर भी इसी तरह से कब्जा हुआ था। इस मामले की रिपोर्ट सिहानी गेट कोतवाली में आरोपी मोती गोयल आदि पर दर्ज हुई थी। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
रिकॉर्ड की जांच कराएंगे
एडीएम प्रशासन अच्छेलाल सिंह यादव का कहना है कि राजकीय और पालिका संपत्तियों का रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी। प्रशासन के पास सभी नगर पालिकाओं की संपत्तियों सहित कितनी संपत्तियां हैं, इसकी लिस्ट तैयार कर जांच होगी। यदि संपत्तियों पर कब्जे मिले तो उन्हें कब्जा मुक्त कराया जाएगा और भू माफियाओं पर कार्रवाई होगी।

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