रासायनिक उर्वरक के दामों में लगी ‘आग’

Bulandshahr Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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-डीएपी, एनपीके और पोटाश के दाम 25-30 फीसदी बढ़े
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-15 माह में तीन गुना बढ़ा डीएपी का मूल्य, किसान चिंतित
सिकंदराबाद। फॉस्फेटिक उर्वरकों का मूल्य बढ़ने से खेती करना महंगा हो गया है। डीएपी (डाई-अमोनियम फास्फेट, डाई) एनपीके एवं पोटाश खाद के मूल्यों में 25-30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कीमत बढ़ने से किसानों को अब डीएपी खाद करीब 13 सौ रुपये में उपलब्ध होगी।
चार नवंबर-2011 से डीएपी का प्रति बोरा रेट 910 रुपये था,जो बढ़कर 1295 रुपये हो गया है। एनपीके (नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटाश) का मूल्य 295.76 रुपये बढ़ाया गया है। अब किसानों को एनपीके 832 रुपये के बजाय 1118.74 रुपये में मिलेगी। पोटाश खाद के मूल्य में 160 रुपये प्रति बोरे की बढ़ोतरी की गई है। किसानों को पोटाश खाद खरीदने के लिए कम से कम 840 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। बता दे कि वर्ष 2011 से अब तक डीएपी के दाम तीन गुना बढ़ चुके हैं। यह बढ़ोतरी चार किश्तों में की गई है। मूल्य वृद्धि से किसानों में सरकार के खिलाफ काफी रोष पनप रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने मूल्य वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग प्रशासन के माध्यम से सरकार से की।

कब कितने बढ़े दाम
31 मार्च, 2011 तक प्रदेश में डीएपी का मूल्य 472 रुपये प्रति बोरा था। इसी वर्ष 01 अप्रैल को दाम 605 रुपये हो गए। सितंबर-2011 को दाम 765 रुपये लागू किया गया। 04 नवंबर दाम 910 रुपये घोषित किया गया। अब दाम 1295 रुपये पर पहुंच गया है।
कोट्स
डॉलर की बढ़ती वेल्यू और रुपये का गिरते स्तर से आयातित फास्फेटिक उर्वरकों के मूल्य में वृद्धि हो रही है। सरकार के हाथ में मूल्य घटना बढ़ाना नही है। कंपनियां बाजार के हिसाब मूल्य बढ़ाती है। प्रदेश में करीब आठ लाख टन उर्वरक पुराने रेट का मौजूद है। किसान बोरे पर एमआरपी देखकर समिति को भुगतान करें।
श्यौराज सिंह
संयुक्त कृषि निदेशक, उर्वरक
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