मुकुंदगढ़ी में फैली रही दर्द की चादर

Bulandshahr Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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औरंगाबाद दुर्घटना में एक और की जान गई, मरने वालों की संख्या हुई 22
सिकंदराबाद। मुकुंदगढ़ी में शुक्रवार को भी गम और दर्द की चादर फैली रही। खामोश लब, आंसुओं से भरी आंखें और एक लंबी खामोशी। औरंगाबाद हादसे के असर की कहानी इतने से ही समझी जा सकती है। कल जान गवाने वाले 21 लोगों में एक नाम और जुड़ गया है। दिल्ली में भर्ती गांव के 24 वर्षीय पप्पू की भी आज दम तोड़ दिया। देर रात पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंची समौती का अंतिम संस्कार आज हो पाया। बीते करीब 50 घंटों में गांव में किसी को चूल्हे जलाने का होश नहीं रहा। दुधमुहें मांओं की गोद में सहमे पडे़ रहे तो थोड़े समझदार बच्चे भी खाना मांगने की हिम्मत नहीं जुटा सके। बड़ों की भूख-प्यास तो जैसे मर ही गई है।
बृहस्पतिवार को औरंगाबाद थाना क्षेत्र के करीमपुर मढ़ैया गांव के पास रोजवेज बस और टाटा-407 में हुई सीधी टक्कर में 21 लोगों की जान चली गई थी जबकि दर्जन भर लोग गंभीर दशा में अस्पतालों में भर्ती थे। मरने वालों में सर्वाधिक नौ मुकुंदगढ़ी के थे। पप्पू का इलाज दिल्ली में चल रहा था लेकिन आज उसकी भी मौत हो गई। सुबह 6:30 बजे जवान बेटे की मौत की खबर मिलते ही पिता हरस्वरूप खुद को संभाल नहीं सके और अचेत होकर गिर पड़े। मां अमरवती भी निढ़ाल हो गई। भाई करम, मुकेश, बबलू और बहनें भी दहाड़ मारकर रोने लगीं। मुकुदंगढ़ी में तड़के रुदन तेज हो गया।
मृतकों के लिए की गई प्रार्थना
बुलंदशहर। औरंगाबाद हादसे में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए दूसरे दिन भी प्रार्थनाओं का दौर जारी रहा।डॉ. भीमराव अंबेडकर अधिवक्ता परिषद ने की ओर से प्रार्थना की गई। अधिवक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखा। सभा की अध्यक्षता मदनपाल सिंह गौतम और संचालन रामवीर सिंह ने किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने राजेबाबू पार्क में बैठक कर बृहस्पतिवार को हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए लोगों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। प्रदेश सचिव हुकुम सिंह ने सरकार से मृतक परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की। आजाद पब्लिक स्कूल में भी शोकसभा का आयोजन किया गया। स्कूल की छात्राओं ने मृतकों को श्रद्धाजंलि दी। बीजेपी , सपा और पीस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अलग- अलग बैठकें करके श्रृजांलि दी।
विधानसभा में उठा मुआवजे का मामला
सिकंदराबाद। हादसे में जान गंवा चुके लोगों के परिजनों के लिए सियासी दलों ने शासन से मुआवजा दिलाने की मांग की। भाजपा विधायक विमला सोलंकी ने बताया कि विधानसभा सत्र में बृहस्पतिवार को उन्होंने सीएम के समक्ष मरने वाले के परिवारों को मुआवजा देने का मामले को रखा।
पांच साल तक पक्की छत मांगते रहे मुकुंदगढ़ी के दलित
सिकंदराबाद। औरंगाबाद हादसे में मुकुंदगढ़ी ने 10 लोग खो दिए। गांव आंसुओं में डूबा है लेकिन दूसरा दुखद पहलू यह है कि दुख मुकुंदगढ़ी की नियति ही है। चाहे विकास की बात हो या सुविधाओं की, यह गांव सबसे पीछे नजर आता है। दलितों के इस गांव पर अंबेडकर गांव चुनने वालों की नजर भी कभी नहीं गई। गांव में न तो आने-जाने का कोई सही इंतजाम है और न ही पानी-बिजली का। 55 परिवारों वाला यह गांव सिकंदराबाद देहात के मजरे में आता है। सरकारी स्कूल है, लेकिन स्कूल में शिक्षकों की कमी है। आधे से ज्यादा मकान कच्चे हैं। बुजुर्ग अजब सिंह बताते हैं कि पांच साल तक लोग प्रशासन से पक्की छत के लिए चक्कर लगाते रहे लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

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