बाघ के हमले से दो लोग बाल-बाल बचे

Bijnor Updated Thu, 23 Jan 2014 05:48 AM IST
बढ़ापुर। मंगलवार की रात में ग्राम सिक्कावाला के गन्ना क्रय केंद्र से अपने घर हरबंशवाला जा रहे बाइक सवार केन गार्ड और उसका साथी बाघ के हमले से बाल-बाल बचे।
चार दिन पूर्व बढ़ापुर वन रेंज के सेला पानी वन क्षेत्र से जलौनी लकड़ियां लेने पहुंचे बढ़ापुर के ग्राम मुकंदपुर राजमल निवासी संजू को एक तेंदुए ने हमला किया था। क्षेत्र के ग्राम हरबंशवाला निवासी जसपाल सिंह उर्फ बंटी ग्राम सिक्कावाला स्थित मिल के गन्ना क्रय केंद्र में केन गार्ड है। बंटी मंगलवार की रात में नौ बजे गन्ना क्रय केंद्र से अपने घर हरबंशवाला जा रहा था। साथ में बाइक पर गांव का जयप्रकाश भी सवार था। बंटी के अनुसार जैसे ही उसने ग्राम कोट ज्वाला मार्ग से हरबंश वाला मार्ग पर टर्न लिया, तभी सड़क के पास खाई में बैठे एक बाघ ने उन पर छलांग लगा हमले का प्रयास किया। बंटी ने बताया कि बाघ के छलांग लगाते समय खाई में एकत्र कीचड़ रुकावट बनने पर बाघ को सड़क तक पहुंचने में चंद मिनट की देरी हुई और वह बाइक दौड़ाकर वहां से निकलने में सफल रहे। सुबह होने पर ग्राम हरबंशवाला के ग्रामीण बंटी के साथ घटना वाले स्थान पहुंचे और मौके पर किसी जानवर के पद चिन्ह देखें। ग्रामीणों ने कहा कि वहां मिले पद चिह्न किसी बाघ या गुलदार के होने की ओर इशारा करते हैं। जंगली जानवरों के हमले से क्षेत्र के ग्रामीण खौफजदा है।

अफसर पहुंचे जंगल, गुलदार गांवाें की ओर
बिजनौर। घर से बेघर गुलदार खेतों में भटक रहे हैं। भटक रहे गुलदारों के कारण खेतों में काम करना दूभर हो गया है। ये सब दो बाघों के शिकार के मामले जांच शुरू होने के बाद हुआ। अब से पहले जिले कभी भी गुलदार को लेकर इतना शोर नहीं मचा।
कार्बेट टाइगर रिवर्ज की सीमा से लगी अमानगढ़ रेंज को टाइगर रिजर्व एरिया घोषित किया हुआ। शिकारियों ने अमानगढ़ टाइगर रिजर्व एरिया के कंपार्टमेंट-50 में 13 दिसंबर की रात को दो बाघों का शिकार किया था। एसटीएफ ने इस मामले में आरोपी शिकारियों को दबोचा था। शिकार की जांच को दिल्ली, गुजरात, लखनऊ, उत्तराखंड, वन्य जीव समूह से संबंधी विभिन्न एजेंसियों ने जांच शुरू की। हर रोज अधिकारियों के वाहन दौड़ते रहे। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व एरिया में खेतों में गुलदार के दिखाई देने से किसानों में हड़कंप मचा है। हर रोज कही- न कही गुलदार दिखाई देने का शोर मचता रहता है।

अब से पहले नहीं मचा गुलदार का शोर :
वर्ष 2013 में हुई वन्य जीवों की गणना में जिले में 22 गुलदार थे। इक्का दुक्का घटनाओं को छोड़कर किसानों को गुलदार दिखाई नहीं देते थे। लेकिन 13 दिसंबर के बाद तो जैसे गुलदारों की बाढ़ सी आ गई। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व एरिया में बाघों के साथ गुलदार, हाथी, चीतल, रीछ आदि जीव भी रहते हैं।

हड़बड़ाहट में एक मरा, दूसरा जख्म :
मंगलवार को अफजलगढ़ क्षेत्र में हड़बड़ाहट के कारण दो युवक वाहन की चपेट में आ गए थे। एक की मौत हो गई थी, दूसरा घायल हो गया था।

शांत वातावरण पसंद है वन्य जीवों को:
पूर्व चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन उत्तराखंड और वन निगम उत्तराखंड के प्रबंध निदेशक श्रीकांत चंदोला के अनुसार वन्य जीवों को शांत वातावरण पसंद होता है। शोरगुल होने पर वन्य जीव वास स्थान को छोड़ देते हैं और आतंकी और हमलावर हो जाते हैं।

बाघिन भी हलचल के कारण निकली जंगल!
वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार जंगल में हलचल और परिवार से बिछड़ने के कारण ही बाघिन जंगल से बाहर निकल आई थी। इसके बाद मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बिजनौर, उत्तराखंड सीमा में आतंक मचाया और सात व्यक्तियों को मार डाला। इसके बाद पुन: जंगल में पहुंचते ही बाघिन शांत हो गई।
डीएफओ विजय सिंह के अनुसार बाघों के शिकार के बाद जंगल में आवाजाही अधिक हुई है। लेकिन बाघिन के आतंक के बाद कुछ ग्रामीण बेवजह अफवाह फैला रहे है। जितना शोर मच रहा है, उतने गुलदार नहीं है।

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