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पिता ने मासूम की फावड़े से गर्दन काटी

Bijnor Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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जलीलपुर। हीमपुरदीपा थाने के गांव धींवरपुरा में एक बेरहम बाप ने पांच साल के मासूम की फावड़े से गर्दन काटकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी बाप को दबोच लिया है। बताया जाता है आरोपी मानसिक रूप से बीमार है।
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घटना शनिवार दोपहर की है। गांव हीमपुरदीपा में हरिराज सिंह दोपहर करीब दो बजे सबसे छोटे पुत्र पांच वर्षीय कृष्णन कुमार को कमरे में बंद कर उसका कत्ल करने का शोर मचा रहा था। शोर सुनकर पत्नी शकुंतला, भाई गुड्डू व महेंद्र आदि परिजनाें ने दरवाजा खुलवाने की काफी कोशिश की, लेकिन उसने दरवाजा नहीं खोला। सूचना पर शाम करीब साढे़ चार बजे एसओ हीमपुर मुस्तकीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तथा दरवाजा तोड़ा तो पांच साल के मासूम का लहूलुहान शव कमरे में पड़ा था। बच्चे की गर्दन धड़ से अलग थी और हरिराज कमरे में ही मौजूद था। खून से सना फावड़ा वहीं पड़ा था। पुलिस ने हरिराज का दबोच लिया तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष के मुताबिक आरोपी हरिराज विक्षिप्त है। उसका आगरा में भी उपचार चला था। हत्या का ओर कोई कारण नहीं निकला है।

मंजर देख चीख निकली
पिता द्वारा बेटे के कत्ल किए जाने की खबर क्षेत्र में फैल गई और वहां भीड़ एकत्र हो गई। पुलिस के साथ कमरे का सबसे पहले मंजर देखने वाले ग्रामीणों के साथ परिजनों की चीख निकल गई। बच्चे की मां शकुंतला दहाड़ें मारकर रोने लगी और कुछ देर बाद बेहोश हो गई। मासूम कृष्णम की गर्दन कानों के नीचे दोनों तरफ गहराई तक कटी थी।। कृष्णन सबसे छोटा था उसकी बहन निर्देश की शादी हो चुकी है, लोकेश, ओमप्रकाश, शिवम तीन भाई हैं।
कर्ज से परेशान था
ग्रामीणों के अनुसार अपने ही बेटे का खून करने वाला हरिराज कुछ महीनाें से कर्ज में डूबा था। इसे लेकर परेशान चल रहा था। हरिराज भाइयों पर दबाव बनाकर उनसे पैसा मांग रहा था।
बच सकता था कृष्णन
हत्यारे हरिराज का कुछ महीनों से गांव आतंक चल रहा था। कभी भी किसी के साथ कुछ भी हरकत कर देता था। कुछ दिन पहले प्रधान से कहासुनी होने पर गांव में लगी सोलर स्ट्रीट लाइटों को चकनाचूर कर दिया। घटना का पता होने के बाद भी कोई उसके सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। सब उसके घर से दूर ही खड़े रहे। पुलिस के पहुंचने के बाद ही लोगों का हजूम आगे बढ़ा। ग्रामीण मिलकर अगर पहले ही दरवाजा तोड़ देते तो शायद मासूम की जान बच सकती थी।

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