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मिट जाऊं वतन पे ये मेरे दिल में लगन है...

Bijnor Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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नजीबाबाद। नेताजी सुभाष चंद बोस जयंती पर स्वतंत्र अभिव्यक्ति की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने देशप्रेम से जुड़ीं रचनाएं प्रस्तुत कीं। नेताजी की आदमकद प्रतिमा बनाने वाली मूर्तिकार व शिक्षिका माला कौशिक को सुभाष अवार्ड से सम्मानित किया गया।
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मोहल्ला मुनीरगंज स्थित इरशाद अहमद के आवास पर हुई काव्यगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि यदि नेताजी न होते तो हमें आजादी भी न मिलती। डॉ. तैयब जमाल की रचना-जमाने में जिसे सब लोग हिंदुस्तान कहते हैं/कोई पूछे अगर हमसे हम अपनी जान कहते हैं...। शादाब जफर शादाब ने फरमाया-मिट जाऊं वतन पे ये मेरे दिल में लगन है/नजरों में मेरी कब से तिरंगे का कफन है...। डॉ. एसके जौहर ने कहा-मैं सख्त था मगर आज रो पड़ा कैसे/दफअतन टूट गया मेरा हौसला कैसे...। माला कौशिक की रचना-भारत हमारी जान है, ये बोलते गए/सिर दुश्मनों के काट के जो खुद भी सो गए...। इकबाल हिंदुस्तानी का तराना-जो भी बिटिया बनी बहू जल रही है आजकल/कश्मकश में पड़ गए हैं बेटियों का क्या करें जनाब... तथा शहबाज इब्ने मख्फी ने बुलंदियों पर तिरंगे की आनबान रहे/हवा में उड़ता हुआ बस यही निशान रहे... रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी।
महेंद्र गोयल की अध्यक्षता व शादाब जफर शादाब के संचालन में हुई काव्य गोष्ठी में अख्तर मुल्तानी, रईस भारती, जलीस नजीबाबादी, मनोज त्यागी, दिलदार अहमद दिल, जियाउद्दीन अंसारी, असलम, सुहेब शहाब शम्सी व दानिश सैफी की रचनाओं को भी सराहा गया। कार्यक्रम में महमूद जफर, इं. मुअज्जम खां, इब्राहीम, सरताज अहमद, इरशाद अहमद, अनीस सैफी, सरताज अहमद आदि उपस्थित थे।
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