दो वर्ष बाद भी नहीं खुली इमरजेंसी

Bijnor Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। मंडावर स्थित सीएचसी का इमरजेंसी कक्ष शोपीस बना हुआ है। मरीजों को भर्ती करने के नाम पर बाहर के लिए टरका दिया जाता है या एक दो घंटे रोकने के बाद घर भेज दिया जाता है, जबकि अस्पताल में तीस मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। डाक्टर सीएचसी परिसर में रहने के बावजूद इमरजेंसी कक्ष नहीं खोलते हैं।
मंडावर सीएचसी का संचालन चिकित्सक मनमानी के अनुसार कर रहे हैं। सीएचसी का निर्माण वर्ष-2010 में हुआ था। तब से लेकर आज तक यहां इमरजेंसी कक्ष पर ताला लटका हुआ है। चिकित्सक शाम होने से पूर्व ही ओपीडी में भी ताला डाल देते हैं। दुर्घटनाओं में घायलों को निजी चिकित्सकों या फिर बिजनौर जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तीस मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। दिन में ओपीडी के समय जो मरीज आते हैं, चिकित्सक उन्हें भर्ती करने के बजाय बिजनौर रेफर कर देते हैं या फिर मरीजों को एक दो घंटा अस्पताल में रोककर शाम होने से पूर्व ही घर भेज देते है। सीएचसी पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. कृष्ण गोपाल व डा. एस राठी तैनात हैं। दोनों ही अस्पताल परिसर में बने सरकारी आवास में रहते हैं, बावजूद इसके इमरजेंसी कक्ष नहीं खोला जाता है।

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