शबरी संवारे रास्ता, आवेंगे राम जी...

Bijnor Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
नजीबाबाद। शबरी संवारे रास्ता, आवेंगेे राम जी....। भगवान श्रीराम के प्रति शबरी के स्नेह और भक्ति को दर्शातीं इन पंक्तियों ने श्रीराम भक्तों को कृतार्थ कर दिया। राम-सुग्रीव मित्रता व बालि वध की लीला देख श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
सीता की खोज में भटकते हुए श्रीराम व लक्ष्मण शबरी के आश्रम में पहुंचे जहां शबरी के जूठे बेर श्रीराम ने प्रेमपूर्वक ग्रहण किए। ऋष्यमूक पर्वत पर अपने भाई बालि से प्राण बचाकर वनों में रह रहे सुग्रीव श्रीराम को आता देख भयभीत हो गए। वास्तविकता का पता लगाने हनुमान ब्राह्मण के वेश में उनके सम्मुख पहुंचे। अपने सामने श्रीराम को पाकर हनुमान गदगद हो उठे। अपने कंधों पर बिठाकर हनुमान ने श्रीराम व लक्ष्मण को सुग्रीव के समक्ष पहुंचाया। श्रीराम ने सुग्रीव को गले लगाकर मित्रता स्वीकार की। साथ ही उसके भाई बालि का वध कर उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिया। बालि व सुग्रीव के युद्ध के दौरान श्रीराम ने एक ही बाण से बालि का वध कर दिया। बालि को मोक्ष प्रदान कर श्रीराम ने बालि पुत्र अंगद को अपनी शरण में ले लिया। श्रीराम ने सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बना दिया। भगवान राम की जय-जयकार से रामलीला मैदान गूंज उठा। गोविंदपाल के निर्देशन, अनंत अग्रवाल के संचालन व राकेश महेंद्रा व नरेंद्र शर्मा के प्रबंधन में हुई रामलीला में हरिओम सिंघल (राम), हनी शर्मा (लक्ष्मण), पवन सिंघल (शबरी), रंधावा सिंह (सुग्रीव), नमन सिंघल (बालि), नवीन शर्मा (हनुमान), सुरेश गुप्ता (जामवंत) व ईश्वर सैनी (तारा) के अभिनय की सराहना हुई।
केकैयी संवाद सुन दर्शक भाव विभोर
अफजलगढ़। राघवेंद्र रंगमंच पर रामलीला मंचन के दौरान वृंदावन से आए कलाकारों ने सुंदर झांकियों का बड़े ही मोहक और सजीव रूप से मंचन प्रस्तुत किया।
गुरुवार को श्री रामलीला मंचन मेें वृंदावन के कलाकारों ने मंथरा केकैयी संवाद, दशरथ केकैयी संवाद, केकैयी कोप भवन, श्रीराम वनवास को बड़े ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। मंथरा ने रानी केकैयी को प्रेरित किया कि वह राजा दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए राजपाठ मांगे। फिर राजा दशरथ को केकैयी द्वारा अपने वचनों से बांधकर कोपभवन जाकर वहां राजा दशरथ से भगवान श्रीराम को वनवास दिलाने और पिता की आज्ञा मानकर राम को बनवास चले जाना आदि मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर संजय लौहिया, विपुल जैन, विनीत, मनोज अग्रवाल, शरद कर्णवाल, अमित, संजय जोशी, विपिन सिसौदिया आदि रहे।
रानी सत्यवती की कहानी का मंचन
बिजनौर। श्री रामलीला सेवा समिति के तत्वाधान मेें आयोजित कृष्ण रासलीला में सत्यवती की विजय कथा का मंचन किया गया। श्री राधांचल लीला संस्थान वृंदावन के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया।
रामलीला मैदान में आयोजित लीला का शुभारंभ समिति सदस्यों ने भगवान कृष्ण की आरती कर किया। इसके बाद कलाकारों ने मयूर नृत्य प्रस्तुत किया। कथा में राजा मद्रसेन शिकार खेलने के लिए वन जाते हैं। वहां सुंदरी नामक एक दुष्ट औरत उन्हें अपने प्रेमजाल में फंसाकर विवाह कर लेती है। महल आने पर सुंदरी राजा की पहली पत्नी सत्यवती पर चुडै़ल होने के झूठे आरोप साबित कर उसे मृत्युदंड दिलवा देती है, लेकिन जल्लाद अपनी भली रानी सत्यवती को मार नहीं पाते और राजा को उसे मारने का झूठा समाचार देते हैं। गर्भवती सत्यवती जंगल में एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम विक्रम रखती है। विक्रम बड़ा होकर सुंदरी से रानी सत्यवती के दुखों का बदला लेते हुए उसे प्रजा के कहने पर मृत्युदंड देता है। प्रेमीजी महाराज व पंडित श्याम सुंदर जी महाराज ने कथा के बीच में अनेक भजन गाए। गोपाल ने सत्यवती, कौशल ने सुंदरी, योगेश ने विक्रम व भूदेव ने राजा मद्रसेन का किरदार निभाया।
राम के जीवन से मिलती है प्रेरणा
कालागढ़। कालागढ़ की केंद्रीय कालोनी में रामलीला मंचन का उद्घाटन विद्युत निगम के उप महाप्रबंधक ओम प्रकाश सिंह और रामगंगा बांध मंडल के अधिशासी अभियंता ज्ञान सिंह ने किया। कहा कि राम के जीवन से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने जीवन को महान बना सकता है। नई कालोनी रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन जारी है। दूसरी तरफ हाईडिल कालोनी में शिवालय और नई कालोनी में देवालय में नवरात्रों की धूम है। इसके अलावा केंद्रीय कालोनी और पुराना कालागढ़ में दुर्गा पूजा की प्रतिमाओं का कामकाज शुरू हो गया है।
राम के वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण
बिजनौर। श्री रामलीला सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलीला में शुक्रवार को राजा दशरथ मरण प्रसंग का मंचन किया गया।
रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला में राम को वनवास हो जाने का पता लगने पर भरत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल से लौट आते हैं। उधर, राम के वियोग से दुखी राजा दशरथ राम-राम करते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। समिति की ओर निकाली जाने वाली राजा दशरथ की अंतिम यात्रा रामलीला मैदान से शुरू होकर मदन मोहन चौक, जैन मंदिर, मोइन का चौराहा, बुल्ला का चौराहा, नगर पालिका चौक, रम्मू का चौराहा, मेरठ चुंगी से तिबड़ी जाकर समाप्त हुई। वहां राजा दशरथ के पुतले का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में भरत व शत्रुघ्न के रूप में कलाकारों के अलावा समिति संयोजक संजय गुप्ता एडवोकेट, अध्यक्ष विनय अग्रवाल, राहुल शर्मा, विभोर शर्मा, श्याम शर्मा, विपिन अग्रवाल, डबलू आदि रहे।
नूरपुर/राजा का ताजपुर। आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में श्रीराम की शोभायात्रा नगर में धूमधाम से निकाली गई। शुक्रवार की शाम तीन बजे रामलीला मैदान से बैंड बाजों के साथ शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान श्रीराम भाई लक्ष्मण एवं सीता के साथ एक सुंदर सिंहासन पर विराजमान थे। शोभायात्रा में हनुमान जी, शिव पार्वती, भगवान श्रीकृष्ण सहित सभी देवी देवताओं की सुंदर झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। बारात में महिलाएं फूलों की बरसात करती चल रही थीं। बैंड बाजों से निकल रही भजनों की धुनों से नगर का वातावरण भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा में निकालने में चौधरी मंगू सिंह, रामप्रकाश सिंह, संजीव चौधरी, सुरेंद्र चौधरी, विजयपाल सिंह, अजयवीर चौधरी, चौधरी जसंवत सिंह, दयाराम सिंह, शेरसिंह सैनी, अमित चौधरी, ओमकार सिंह अशोक चौधरी, आदि का सराहनीय योगदान रहा।
उधर, राजा का ताजपुर में भी श्रीराम शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। रामलीला मैदान से बाबू सिंह चौहान ने फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। शोभायात्रा में कमेटी संरक्षक विकास, रामचरन सिंह, अशोक त्यागी, चमनलाल, राकेश शर्मा, आदि का योगदान रहा।
हल्दौर। हल्दौर एवं पैजनिया में श्रीराम शोभायात्रा निकाली गई। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की झांकियां, शंकर पार्वती, मां वैष्णों देवी, साईं बाबा की झांकिया आकर्षण का केन्द्र रहीं। माइक से श्रीरामचरित मानस की चौपाइयों द्वारा प्रभु राम का गुणगान किया जा रहा था। संजीव, नीशू, अर्पित, मयंक का सहयोग रहा। पैजनिया में श्रीराम शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां थीं। अशोक त्यागी, रविदत्त शर्मा, मूलचंद शर्मा, मुन्नालाल सैनी ग्राम प्रधान, श्याम सिंह ठेकेदार का सहयोग रहा।
रामलीला में स्पेशल साउंड इफेक्ट्स
नजीबाबाद। इसमे संशय नहीं कि हाईटेक युग में पारंपरिक रामलीला का भी आधुनिकीकरण हो गया है। रामलीला के विशेष दृश्यों में अब स्पेशल साउंड इफेक्ट्स का प्रयोग किया जा रहा है।
पारंपरिक रामलीला में कभी साजिंदों की धुनों पर युद्ध आदि के दृश्यों का मंचन किया जाता था। साजिंदों की धुनों पर ही नृतक नृत्य प्रस्तुत करते थे। अब बैकग्राउंड में चल रहे स्पेशल साउंड इफेक्ट्स के साथ दर्शक लीला का आनंद उठाते हैं। रामलीला में हारमोनियम पर मुख्तार की धुनें व करम साबरी की ढोलक पर थाप सुनाई देती है जो अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। साजिंदे बताते हैं कि दशकों से उनका खानदान रामलीला में सेवा करता आ रहा है। आधुनिकीकरण उनके व्यवसाय को प्रभावित कर रहा है। उधर, रामलीला संचालक अनंत अग्रवाल का कहना है कि दर्शकों की पसंद का ध्यान रखना पड़ता है। दर्शक अब पारंपरिक धुनों के स्थान पर रामायण की आधुनिक धुनें सुनना पसंद करते हैं।

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