काल बनी कंसौदी

Bijnor Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। मासूमों की जान की दुश्मन बनी कंसौदी की फली ने जिले में फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। खेल-खेल में कसौंदी की फली खाने से एक बालिका की मौत हो गई तथा दूसरी की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो गांवों में हुई इन घटनाओं से लोग खौफजदा हैं और पीड़ित घरों में कोहराम मचा हुआ है।
जिले में कातिल बनी कसौंदी की फली हर साल बच्चों की जान ले रही है। सर्दी शुरू होते ही बच्चों की इस फली को खाने से जान चली जाती है। इस फली के खिलाफ शुरू में प्रचार प्रसार भी हुआ जो बाद में बंद कर दिया गया। फली जंगलों के अलावा मकानों के आसपास झाड़ में खड़ी मिलती है। बिजनौर के निकट गांव सदुपुरा के रहने वाले तसलीम की चार साल की पुत्री ने आतिबा ने खेल-खेल में पांच दिन पहले गांव में कसौंदी की फली खा ली। हालत बिगड़ने पर परिजन गांव में ही उसका उपचार कराते रहे। बुधवार को आतिबा की हालत बिगड़ने पर उसे बिजनौर के एक बाल रोग विशेषज्ञ के यहां भर्ती कराया, जहां रात में बच्ची ने दम तोड दिया। बालिका के परिजनों के मुताबिक आतिबा ने कसौंदी की फली खाई थी। कसौंदी की फली से जान देने वाली आतिशा इस साल की पहली बालिका है।
उधर, चांदपुर क्षेत्र के गांव बागड़पुर निवासी भूपेंद्र के पांच साल के पुत्र अभय ने भी चार दिन पहले खेल-खेल में गांव में कसौदी की फली खा ली थी। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने गुरुवार को उसे निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया। अभय की हालत में कोई सुधार नहीं है। परिजनों के मुताबिक अभय की हालत कसौंदी की फली खाने के बाद बिगड़ी है। डीएम डा. सारिका मोहन के मुताबिक कसौंदी की फली का मामला उनके सज्ञान में नहीं है। वे वन विभाग के अफसरों से इस पेड़ के बारे में जानकारी लेकर कार्रवाई कराएंगी।
स्वास्थ्य विभाग बेखबर
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कसौंदी के खिलाफ किए गए व्यापक प्रचार प्रसार की पोल खुल गई है। बरसात का मौसम समाप्त होते ही विभाग को कसौंदी के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने व उसे नष्ट कराने के निर्देश है। कसौंदी की फसली का सीजन शुरू होते ही एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर हालत में निजी चिकित्सक के यहां भर्ती है।
कसौंदी की फली को बच्चे खेल-खेल में खा जाते हैं। बच्चों का यही खेल उनके लिए जानलेवा साबित हो जाता है। इसके लिए शासन स्वास्थ्य विभाग को कसौंदी के खिलाफ व्यापक प्रचार करने निर्देश दे रखे हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में पंफ्लेट बंटवाकर, आशाओं व एएनएम के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के निर्देश हैं। बरसात समाप्त होते ही अभियान चलवाकर स्कूलों के आसपास कसौंदी के पौधों को नष्ट कराने की जिम्मेदारी भी है, लेकिन विभाग अपनी जिम्मेदारियों पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है।
गत तीन वर्षों में कसौंदी के खाने से हुई बच्चाें की मौतें
वर्ष मौत
2000 06
2001 04
2002 16
2003 13
2004 17
2005 12
2006 17
2007 23
2008 16
2009 12
2010 08
2011 06
सीएमओ डा. शशि कुमार अग्निहोत्री का कहना है कि कसौंदी के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया गया था। एक बार पुन: अभियान चलाया जाएगा तथा कसौंदी को नष्ट कराया जाएगा।

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