एक भी विदेशी पर्यटक नहीं आया बिजनौर

Bijnor Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। मेजबानी में कमी कहें या जिले के पर्यटन स्थलों की बदहाली, जिले के एतिहासिक स्थल विदेशी मेहमानों को आकर्षित नहीं का पा रहे हैं। गत वत वर्ष जिले में जहां करीब 20 पर्यटक आए थे, वहीं इस बार एक भी विदेशी मेहमान (पर्यटक) नहीं आया। जिले के किसी भी होटल से विदेशी मेहमान के बिजनौर आने की कोई सूचना खुफिया विभाग को नहीं मिली है।
बिजनौर सेदस किलोमीटर दूर गंगा व मालन के संगम पर रावली में कण्व ऋषि का आश्रम है, जहां माता शकुंतला रहती थीं, यहीं पर राजा भरत का जन्म भी हुआ। बिजनौर जिले को भरत भूमि के नाम से भी जाना जाता है। महात्मा विदुर की कुटिया भी दारानगर गंज में स्थित है, जहां महात्मा विदुर रहते थे। यह स्थल महाभारत सर्किट में भी शामिल है। सैंदवार में गुरु द्रोण का आश्रम था, जहां पर पांडवों व कौरवों को युद्ध कौशल का प्रशिक्षण दिया गया। यह स्थल भी महाभारत सर्किट में शामिल है। नजीबाबाद में जगत प्रसिद्ध नजीबुद्दौला का किला, बढ़ापुर के काशीवाला फार्म पर भगवान पार्श्वनाथ (पारसनाथ) का मंदिर है। यहां पर जिधर भी खुदाई हुई वहीं पर प्राचीन कालीन जैन समाज की मूर्तियां निकली हैं। मान्यता है कि यहां भगवान पार्श्वनाथ की जन्मस्थली है।
हर वर्ष भारी संख्या में देश से जैन समाज के लोग काशीवाला में आते हैं। मंडावर क्षेत्र बौद्ध स्थली के रूप में जाना जाता है। यहां पर भी खुदाई में बौद्ध समाज से जुड़ी काफी मूर्तियां निकली हैं। यहां पर चीनी यात्री ह्यूनसांग भी आया था। गुलामवंश के शासक इल्तुतमिश मंडावर में सात दिन तक रहे थे। मंडावर में महारानी विक्टोरिया को उर्दू सिखाने वाले शाहमत अली का प्रसिद्ध किला भी है, लेकिन शाहमत अली देश बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए थे, उनका किला अभी भी मंडावर में है। इसके अतिरिक्त अन्य स्थल भी इतिहास के पन्नो पर छाए हुए हैं, लेकिन बिजनौर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया गया। काशीवाला भगवान पारसनाथ की जन्मस्थली होने के बाद भी जैन सर्किट में शामिल नहीं है और मंडावर भी बौद्ध सर्किट से बाहर है। विदुर कुटी का भी कोई खास विकास नहीं हो पाया है। पर्यटन स्थलों की बदहाली के चलते जिले से अब विदेशी मेहमानों का भी मोहभंग हो गया है। खुफिया विभाग के अनुसार वर्ष 2009 में 50 गत वर्ष 20 विदेशी मेहमान बिजनौर आए थे। इससे पूर्व में जिले में विदेशी मेहमानों की संख्या सैकड़ा भी पार कर चुकी है, लेकिन इस वर्ष एक भी विदेशी मेहमान जिले में नहीं आया है। यह बात दीगर है कि कुछ विदेशी पर्यटक बिजनौर से गुजरे हैं। खुफिया विभाग के मुताबिक विदेशी मेहमान जब कहीं पर ठहरते हैं तो होटल या मकान स्वामी द्वारा उनके पास फार्म सी भरकर जमा किया जाता है, लेकिन एक भी फार्म खुफिया विभाग को नहीं मिला है।
पर्यटन राज्यमंत्री मूलचंद चौहान का कहना है कि पर्यटन स्थल को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई स्थलों को विकास को लेकर फाइल तैयार की जा रही है।

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