दम तोड़ रही कालागढ़ की बाघ परियोजना

Bijnor Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
कालागढ़।1973 में कालागढ़ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शुरू की कार्बेट टाइगर रिजर्व की बाघ परियोजना विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते दम तोड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद कार्बेट टाइगर रिजर्व में पर्यटन पर तो रोक लगा दी गई है, परंतु बफर जोन व सीमावर्ती इलाके में गश्त न होने की वजह से टाइगर व गुलदार के अस्तित्व को खतरा पैदा हो रहा है।
भारतीय उपमहादीप का सबसे पुराना कार्बेट टाइगर रिजर्व दुनिया में बाघो की राजधानी के नाम से जाना जाता है। टाइगर की बढ़ती संख्या व सिकुड़ते क्षेत्र की वजह से बाघ व गुलदार जैसे जीव सीमावर्ती इलाके में अपना प्राकृतावास बनाते जा रहे हैं। जिसकी वजह से गन्ने के खेत इनका प्राकृतावास बन रहे हैं। दो दिन पूर्व कार्बेट टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे धारा नदी के तटवर्ती घासीवाला में गुलदार के दो शावक मां से अलग कर दिए गए। वन विभाग स्वयं मानता है कि उसके पास कर्मचारी कम हैं, जिसकी वजह से गश्त नहीं हो पाती है। इससे यह जीव खेतों में रह रहे हैं। यह पहला मामला नहीं है इससे पूर्व भिक्कावाला में एक खेत में तारबाढ़ में फंस कर एक बाघ की मौत हो चुकी है। एक वर्ष पूर्व बफर के कालागढ़ टाइगर रिजर्व में एक गुलदार को गांव वालों ने जिंदा जला दिया था। अब तीन शावकों को उनके प्राकृतावास से हटाकर ले जाने की वजह से चिड़ियाघर भेज दिए गए।
वन विभाग सचेत नही, एनटीसीए से होगी शिकायत
कालागढ़। उत्तराखंड वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पूर्व सदस्य व प्रोटेक्शन सोसाइटी आफ इंडिया के उत्तराखंड प्रभारी राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि कार्बेट टाइगर रिजर्व व उससे लगे सीमावर्ती इलाके हमेशा ही बावरिया गिरोह के निशाने पर रहे हैं। यह अति संवेदनशील इलाके हैं। यहां पर कांबिग व गश्त का न होना विभाग की लापरवाही को उजागर करता है। गुलदार के तीन शावकों को प्राकृतावास से सबसे पहले किसने हटाया। इसकी जांच होनी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण को लिखा जा रहा है। उन वनकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जो इन शावकों को मां से अलग कराने में शामिल रहे हैं। यदि एक बार बाघ या गुलदार के बच्चों को कोई मानव छू ले तो यह जीव उसे दुबारा अपनाते नहीं हैं। चिड़ियाघर में जाने के बाद इस जीव का व्यवहार प्राकृतिक नहीं रह जाता है। वह तो घरेलू जीव ही बन जाता है।
164 बाघ हैं कालागढ़ क्षेत्र में
कालागढ़। विभागीय सैंसस के अनुसार कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ क्षेत्र में 164 बाघों का कुनबा है। इसके अलावा टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ रेंज, नगीना रेंज आदि में इनकी उपस्थिति दर्ज है।

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