गोबर से चलेगा नलकूप, लहलहाएंगी फसलें

Bijnor Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। पशुपालक किसानों की फसलें अब बिजली किल्लत के चलते सिंचाई के अभाव में नहीं सूखेंगी। पशुओं के गोबर से ही नलकूप चलेगा, इसके लिए किसानों को गोबर गैस जेनरेटर प्लांट लगाना होगा। मुरादाबाद मंडल में इस प्लांट की शुरुआत बिजनौर के बढ़ापुर क्षेत्र से हो रही है। यहां पर पूर्व राज्यमंत्री क्रांति कुमार के फार्म पर गोबर गैस जेनरेटर प्लांट लगाया जा रहा है।
जनपद में बिजली की ताबड़तोड़ कटौती की जा रही है। नहरें भी समय पर नहीं चलती हैं। कुछ क्षेत्र अभी भी ऐसे हैं, जहां न तो नहर ही पहुंच पाई है और न ही बिजली। ऐसे क्षेत्रों के लिए गोबर गैस जेनरेटर प्लांट वरदान माना जा रहा है। आठ हार्सपावर के नलकूप को चलाने के लिए छह किलोवाट क्षमता के जेनरेटर की जरूरत पड़ेगी। बढ़ापुर के वन क्षेेत्र में पूर्व राज्यमंत्री क्रांति कुमार के फार्म पर नलकूप चलाने के लिए इस प्लांट को बनाने का काम शुरू हो गया है। जिले में बन रहा यह प्लांट मुरादाबाद मंडल का पहला प्लांट है। अहम बात यह है कि इस वन क्षेत्र में दूर-दूर तक भी न तो नहर है और न ही बिजली। प्लांट का फाउंडेशन बन चुका है, अब केवल जेनरेटर आना बाकी है। प्लांट से हर रोज करीब 14 से 15 घंटे तक नॉन स्टॉप नलकूप चलाया जा सकता है, जिससे हर रोज करीब दस बीघा जमीन की सिंचाई आसानी से की जा सकेगी। प्लांट में प्रति घंटे तीन किलोग्राम गैस खर्च होगी। प्लांट को 16 घंटे चलाने के लिए करीब सौ पशुआें के गोबर की आवश्यकता होगी। परियोजना अधिकारी नेडा आरके पांडे के मुताबिक पूर्व मंत्री के फार्म पर बड़ी संख्या में पशुपालन हो रहा है। अधिक पालन करने वाले अन्य किसानों से भी प्लांट लगवाने के लिए संपर्क किया जा रहा है।
अनुदान पर लग रहा प्लांट
छह किलोवाट का गोबर गैस जेनरेटर प्लांट करीब 9.20 लाख रुपये का है, जिस पर केंद्र सरकार की ओर से 2.40 लाख रुपये की सब्सिडी मिल रही है। यह सब्सिडी जेनरेटर पर मिलती है। 60 घन मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस प्लांट में जनरेटर पर ही अनुदान दिया जाता है।
कैसे चलेगा जनरेटर
गोबर को हर रोज प्लांट के गड्ढे में डालकर पानी मिलाया जाएगा। गोबर से बनने वाली गैस पाइप के जरिये जेनरेटर सिस्टम तक पहुंचेगी और जेनरेटर गैस के जरिये संचालित होगा।
ट्रायल में है अभी घरेलू जेनरेटर
घरेलू जेनरेटर अभी ट्रायल में है। जल्द ही घरेलू गोबर गैस जनरेटर किसानों के घर तक पहुंच जाएगा। दस से 15 पशुओं का पालन करने वाले किसानों के लिए एक किलोवाट का जेनरेटर तैयार किया गया है। इस प्लांट में गैस का इस्तेमाल खाना बनाने में करने के साथ जनरेटर चलाने में भी किया जाता है, तो सात घंटे तक प्लांट एनर्जी दे सकता है। अगर कुकिंग गैस के रूप में इस्तेमाल न करके केवल पंखा, टीवी, कूलर ही संचालित किया गया तो करीब आठ से दस घंटे तक प्लांट एनर्जी देगा।
खाद पर नहीं पड़ेगा प्रभाव
नेडा अधिकारी के अनुसार प्लांट में इस्तेमाल होने वाले गोबर को खाद में रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। खाद की क्षमता और गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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