बिजनौर क्षेत्र में भूकंप का खतरा बढ़ा

Bijnor Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। नगर व आसपास के क्षेत्र में भूकंप का खतरा लगातार बढ़ रहा है। अब तक जहां निर्माण के क्षेत्र में स्ट्रक्चरल इंजीनियर एवं आर्किटेक्ट जोन चार की तीव्रता को आधार मानकर भवन के मानक निर्धारित करते चले आ रहे थे, वहीं अब भूकंप की तीव्रता का निर्धारण जोन फाइव को मानकर भवन के स्ट्रक्चर एवं संबंधित कंकरीट आदि का ग्रेड निर्धारण कर रहे हैं। माना जा रहा है कि भूकंप की तीव्रता बढ़ने की संभावना के चलते यह फेरबदल किया गया है।
भूगर्भ वैज्ञानिक भी लगातार अपने अध्ययन से इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अर्थ प्लेट लगातार एक दूसरे के ऊपर घर्षण कर रही है, जिस कारण भूकंप की तीव्रता के बढ़ने के पूरे आसार हैं। बिजनौर व आसपास के क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। बिजनौर क्षेत्र सेस्मिक जोन फोर (अतिसंवेदनशील) में शामिल है, इसीलिए आर्किटेक्स एवं स्ट्रक्चरल इंजीनियर इसी को आधार बनाकर भवन निर्माण का डिजाइन बनाते थे, लेकिन अब हाल ही में भवन के डिजाइन में प्रयोग होने वाले मानकों की गणना सेस्मिक जोन फाइव (अत्यंत संवेदनशील) को आधार बनाकर की जा रही है। इससे माना जा रहा है कि बिजनौर व आसपास के क्षेत्र में भूकंप की तीव्रता बढ़ सकती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बिजनौर व आसपास के क्षेत्रों में विगत दस वर्षों में करीब 15 बड़े भूकंप रिकॉर्ड किए गए हैं। अमूमन हर साल यहां पर भूकंप आ रहा है। एक दशक से पूर्व यह स्थिति नहीं थी।
विनिमय क्षेत्र के जेई वीके गुप्ता का कहना है कि भवन निर्माण की अनुज्ञा देते समय यह ध्यान रखा जाता है कि भवन निर्माण में भूकंप रोधी तकनीक का पालन किया जाए। इसके अतिरिक्त भूकंप रोधी व्यवस्थाओं को दृष्टिगत रखते हुए बहुमंजिले एवं बड़े भवनों के निर्माण का मानचित्र स्वीकृत करते समय स्ट्रक्चरल डिजाइन को भी देखा जाता है।
डीएम का आवास भी खतरे में
बिजनौर में डीएम का आवास भी खतरे में है। वर्ष 1990 के आसपास पीडब्ल्यूडी द्वारा गठित इंजीनियरों की टीम ने डीएम आवास को असुरक्षित घोषित कर दिया था। इस रिपोर्ट का आधार डीएम के भवन में प्रयुक्त हुई निर्माण सामग्री एवं भवन की आयु को आधार बनाया गया था। इंडियन कोड के मुताबिक कोई भवन सौ साल से अधिक समय के लिए डिजाइन नहीं किया जा सकता है। डीएम का भवन सन 1800 के आसपास बना था। भवन की अनुमन्य आयु सीमा समाप्त हो चुकी है। नए भवन को बनाने के लिए प्रपोजल भी शासन को भेजा गया था, जो आज तक भी मंजूर नहीं हुआ है।
आबादी के बीच खड़े हैं जर्जर भवन
आबादी के बीच मौत के वाहक जर्जर भवन अभी भी खड़े हुए हैं। इन भवनों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। भूकंप आया तबाही मचनी लाजिमी है। निजी क्षेत्र में बन रही ज्यादातर बिल्डिंग में भूकंप रोधी तकनीकी नहीं अपनाई जा रही है।

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