18 निकायों में पांच जेई के हवाले अरबों रुपये के काम

Bijnor Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। जिले की नगरपालिकाओं व नगर पंचायतों में जेई नहीं बल्कि ठेकेदार खुद ही एमबी बनाकर निर्माण कार्य कर रहे हैं और बिना एई व जेई के सुपर विजन के ही पुल, सड़कें और बिल्डिंगें बन रही हैं। चोंकिए मत, यह जिले में स्थानीय निकायों की हकीकत है। गजब तो यह है कि सभी 18 स्थानीय निकायों में एक भी एई नहीं है, तो वहीं पांच जेई के हवाले अरबों रुपये की लागत से होने वाले निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी। नतीजा जेई को निर्माण कार्य देखना तो दूर साइड पर जाने तक की फुरसत नहीं है। यही वजह है कि आए दिन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में खेल का मामले उजागर हो रहे हैं।
जिले में 12 नगरपालिकाएं व छह नगर पंचायतें हैं। प्रत्येक नगर पालिका के विकास के लिए औसतन 15 करोड़ रुपया आता है। नगर पंचायतों को भी आठ से दस करोड़ रुपया मिलता है। औसतन सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को दो अरब के आसपास रुपया प्रतिवर्ष विकास कार्यों के लिए मिल रहा है। निर्माण कार्यों को सही तरह से कराने की जिम्मेदारी जेई की होती है। जिले में केवल पांच जेई हैं। एक जेई पर कई कई निकाय के विकास कार्यों की जिम्मेदारी है।
आदेश है कि लेंटर, पुल आदि कार्य एई की मौजूदगी में होगा। पूरे जनपद की पालिकाओं में एई कोई नहीं है। दूसरे विभागों में भी इंजीनियर कम हैं। ऐसे में भवन निर्माण पुल आदि के कार्य कैसे हो रहे हैं, यह अंदाज लगाया जा सकता है। अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि स्टाफ बहुत कम है, किंतु सरकार की नीति है। इसलिए ऐसे ही काम चलाना पड़ रहा है।
कहां कहां करे निगरानी?
अवर अभियंता पीडी जायसवाल पर बिजनौर, किरतपुर पालिका और झालू नगर पंचायत, अवर अभियंता रमेश चंद पर हल्दौर और चांदपुर नगर पालिका, योगेश कुमार पर धामपुर, स्योहारा, सहसपुर,शेरकोट, अफजलगढ़ नगर पालिका मेें तैनात जंग बहादुर मौर्य पर नगीना, बढ़ापुर, अवर अभियंता उमेश बाबू पर नजीबाबाद, साहनपुर, जलालाबाद और मंडावर नगर पंचायतों का प्रभार है। सिर्फ जेई मनीश वैद्य पर ही अकेले नहटौर पालिका की जिम्मेदारी है।
ऐसे बन रही फर्जी एमबी
पालिकाओं में तैनात अवर अभियंताओं पर वर्क लोड होने के कारण वे ठेकेदारों से ही एमबी बनवाने को कह देते हैं। ठेकेदार किसी सेवानिवृत्त जेेई से एमबी बनवा लेते हैं और जल निगम या लोकनिर्र्माण विभाग के जेई और एई की मोहर लगा फर्जी एमबी बनी दिखा कर कार्य करते हैं।
कई बार पकड़े गए मामले
-तत्कालीन जिलाधिकारी एसके वर्मा के समय में किरतपुर में छह लाख की लागत से बने नलकूपों की जल निगम के अभियंता हुकम सिंह द्वारा की गई जांच में एमबी पर फर्जी हस्ताक्षर व कार्यालय की फर्जी मोहर लगी पाई गई थी।
- हाल ही में बिजनौर नगर पालिका में भी ऐसा ही मामला प्रकाश में आया। जिलाधिकारी सारिका मोहन ने इस मामले में अवर अभियंता से रिकवरी के आदेश दिए हैं।

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