प्रतिभाओं का गांव है बल्दिया

Bijnor Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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बिजनौर। देश की आर्थिक व्यवस्था में गांव का विशेष महत्व है। यदि कोई ग्रामीण किसी क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करता है तो पूरे गांव के लोग गर्व महसूस करते हैं। जिले में कई गांव ऐसे हैं, जिनकी किसी न किसी वजह से अपनी विशेष पहचान है, इनमें से एक है हल्दौर ब्लॉक का बल्दिया।
छह हजार की आबादी वाले बल्दिया गांव में प्रतिभाओं की भरमार है। गांव के निवासी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। गांव में लगभग 25 वकील हैं। दो लड़कियाें समेत सात युवा, पुलिस सेवा में तैनात हैं। भूमि संरक्षण अधिकारी, चिकित्सक, पशु चिकित्सक और कई लोग इंजीनियर भी हैं। धीर सिंह विद्युत निगम से रिटायर्ड एसडीओ है। दो व्यक्ति में दिल्ली में पोस्ट ऑफिस में अधिकारी हैं। मुनेश एलएलबी करने के बाद सीए की तैयारी कर रहे हैं। ब्रजवीर रूस से एमबीबीएस कर चुके हैं। बबलू मध्यप्रदेश की एक शुगर मिल में चीफ केमिस्ट है। यशपाल सिंह बिजनौर में जिला सहायक संख्या अधिकारी है। राजेंद्र सिंह एडवोकेट जिला बार के अध्यक्ष रह चुके है। पूरन सिंह दो बार जिला रेवेन्यू बार के अध्यक्ष रह चुके हैं। सेना में ड्रेस मेकर, बीएचईएल में खाद्य अधिकारी, रेलवे में सीनियर इंजीनियर के अतिरिक्त कई पदों पर गांव के लोग कार्यरत है। गांव का ही विकास चौधरी वीरेंद्र सहवाग, संजय बंागर, मुहम्मद कैफ आदि खिलाड़ियों के साथ रेलवे की ओर से रणजी मैच खेल चुका है। वह फिल्मों में भी अभिनय कर रहा है। विपिन चौधरी कुश्ती में यूनिवर्सिटी चैंपियन रहा है।

गांवों के अजब-गजब नाम
जिले में कई गांवों के नाम बडे़ ही अजीब हैं। लोग अक्कर इन नामों को लेकर हिचकिचाते हैं। हल्दौर ब्लॉक में एक गांव रावणपुर हैं। गांव के जोगेेंद्र सिंह का कहना है कि लोग उनके गांव का नाम सुनकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। लगभग 700 लोगों की आबादी वाला गांव है सड़ियापुर। गांव पूरी तरह से साफ -सुथरा होने के बाद भी सड़ियापुर के नाम से जाना जाता है। जितेंद्र सिंह बताते हैं कि गांव का नाम बदलावने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके अलावा जिले में कुत्तोपुर व गिदड़पुरा नामक गांव भी हैं।

ऐसे पड़ा बल्दिया नाम
रेवेन्यू बार के पूर्व अध्यक्ष पूरन सिंह के मुताबिक इस क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण के भाई बलराम सिंह आए थे। थकान होने पर उन्होंने अपना हल गांव से कुछ दूरी पर रख दिया, जिसका नाम हल्दौर पड़ा। बलराम सिंह कुछ समय के लिए बल्दिया (उस समय वन खंड) में ठहरे थे। यहां पर काफी ग्वाले रहते थे। बलराम भी यहां पर काफी समय तक रहे। तभी से इस गांव को अपभ्रंश शब्द बल्धिया(ग्वाला) कहा जाता है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि बलराम सिंह, उमराव सिंह, केसोराम, जोगीराम चार भाई थे। उनके नाम पर चार मौजों के नाम रखे गए। बलराम सिंह के नाम पर बल्दिया नाम रखा गया। सन 1980 की चकबंदी में चारों मौजों को मिलाकर एक गांव बनाया गया। गांव सुल्तानपुर में खुदाई के दौरान कुछ अवशेष भी मिले, जिसकी जांच करने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम भी गांव में आई थी। 35 साल पूर्व ओएनजीसी की टीम ने भी गांव में तेल को लेकर खोज की थी।

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