बिजली की किल्लत से हथकरघा उद्योग प्रभावित

Bijnor Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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बिजनौर। जिले में कच्चे माल की कमी और बिजली की किल्लत हथकरघा उद्योग को निगलती जा रही है। जनपद में भले ही चार हजार से अधिक हथकरघा उद्योगों में हर साल करीब एक करोड़ रुपये का वस्त्र बन रहा हो, लेकिन यहां धागे की डिपो आज तक भी नहीं खोली गई है। बाहरी जनपदों से बुनकरों को धागा लाना पड़ता है, जिसे लाने में कई कई दिन लग जाते हैं। नतीजा हथकरघा उद्योग सिमटता जा रहा है। बिजली की किल्लत भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
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जिले में डेढ़ दशक पूर्व करीब दस हजार हथकरघा में एक लाख से ज्यादा बुनकर काम करते थे, लेकिन अब हथकरघा उद्योगों की संख्या घटकर करीब चार हजार के पास पहुंच गई है। यहां बने कपड़े व वस्त्रों की काफी डिमांड है। नहटौर क्षेत्र में बना स्कार्फ विदेशों में भी खूब सप्लाई हो रहा है। जिले भर में हथकरघा का करीब एक करोड़ रुपये का कारोबार है। पिछले कुछ सालों से हथकरघा उद्योग लड़खड़ा गया है। जिले में लंबे समय से धागे की डिपो बनाने, धागे पर छूट दिए जाने और अलग फीडर से बिजली आपूर्ति की मांग करते चली आ रही है, लेकिन अभी तक भी बुनकरों की यह मांग पूरी नहीं हुई है। जिले में डिपो नहीं होने से बुनकरों को दिल्ली व अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से कच्चा माल लाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त बिजली नहीं आने पर जनरेटर से मशीनों को चलाना पड़ रहा है, जिसमें अधिक खर्च आ रहा है। हथकरघा उद्योग चला रहे मकसूद अहमद, अब्दुल सत्तार, मुहम्मद अली, मुहम्मद अफसर आदि का कहना है कि दक्षिण भारत में बुनकरों को धागे पर छूट दी जाती है, मगर यहां पर छूट नहीं मिल रही है। अन्य समस्याओं का समाधान भी नहीं हो पा रहा है, जिससे बुनकरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वस्त्र निरीक्षक पप्पू का कहना है कि हथकरघा उद्योग में कच्चे माल के साथ साथ बिजली की किल्लत भी परेशानी पैदा कर रही है। जिले में डिपो बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
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