इस शहर की रोशनी में ढूंढना पड़ता है घर...

Bijnor Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। नगर के हिंदी प्रेमियों की सिविल लाइन स्थित आयुशाला पर हुई बैठक में हिंदी के उत्थान व प्रचार-प्रसार की रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में शहीद खुदीराम बोस के बलिदान दिवस पर प्रकाश डाला तथा कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।
बैठक में हुक्का बिजनौरी ने स्वतंत्रता संग्राम में सबसे कम आयु में शहीद होने वाले क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बलिदान दिवस पर प्रकाश डाला। उन्होंने मां पर दोहे सुनाए। इसके बाद सुशील कर्णवाल ने नाक से बांसुरी गीत की धुन सुनाई। बैठक में सुधीर कर्णवाल की रचना-इस शहर की रोशनी में ढूंढना पड़ता है घर...., युवा कवि ओमप्रकाश ने कुछ इस तरह गुदगुदाया-बदल सके नहीं वक्त को मानव, दावन, भगवान... सुना सभी को भाव विभोर कर दिया। रमेश राजहंस ने, बाबा जी ने चक्र चलाया, भोली जनता को बहकाया..., जयनारायण अरुण की रचना- हमें तो रोशनी को कह रहे हैं... और वैद्य अजय गर्ग ने रामचरित के संदर्भ में मित्र की परिभाषा दी। उन्होंने हिंदी साहित्य संगम के नाम से प्रत्येक माह गोष्ठी करने की घोषणा की। मुख्य अतिथि वीपी गुप्ता रहे। बैठक की अध्यक्षता जय नारायण अरुण व संचालन हुक्का बिजनौरी ने किया।

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