आयुष्मान योजना: 94 हजार लाभार्थी, 1425 का उपचार

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 01 Jul 2019 12:21 AM IST
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ज्ञानपुर। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना जिले में परवान नहीं चढ़ सकी। प्राइवेट अस्पतालों की ओर से रुचि न लेने से पांच फीसदी मरीज भी योजना का लाभ नहीं पा सके। 94 हजार लाभार्थियों में मात्र 1425 को ही लाभ मिल सका। अब भी बड़ी संख्या में पात्र लोग भी योजना से वंचित हैं।
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आर्थिक परेशानी से समुचित उपचार नहीं कराने से कई लोगों को जान गंवानी पड़ती है। ऐसे लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू की। इस योजना में लाभार्थी परिवार के किसी सदस्य की बीमारी में पांच लाख तक का खर्च सरकार उठाएगी। कई महीने की मशक्कत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 94 हजार 967 परिवारों का चयन किया गया और 72 हजार को गोल्डन कार्ड वितरित हो गए। करीब एक वर्ष बाद योजना में पांच फीसदी लोग भी लाभ नहीं पा सके। उपचार के लिए दो सरकारी और 20 प्राइवेट अस्पतालों को चयनित किया गया है। इन अस्पतालों में मरीज के सभी बीमारी का उपचार किया जाता है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्ष भर पूर्व शुरू हुई योजना में तेजी से काम कया जा रहा है। 72 हजार लाभार्थियों को कार्ड दिया जा चुका है, जो बचे हैं उन्हें भी जल्द कार्ड मिल जाएगा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञानपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.लक्ष्मी सिंह ने बताया कि आयुष्मान योजना के प्रचार-प्रसार के लिए आयुष्मान पखवारा चल रहा है। 24 जून से आठ जुलाई तक चलने वाले पखवारे को लेकर ब्लॉकों में गोष्ठी आयोजित की जा रही है। बताया कि शिविर में वह खुद मौजूद रह कर लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ही कार्ड दिया जाएगा।
ज्ञानपुर। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को प्रभावी किया। इसमें आयुष्मान से वंचित लोगों को शामिल कर पांच लाख तक नि:शुल्क उपचार दिया जाना है। जन आरोग्य योजना में कुल 22 हजार 865 लाभार्थियों में 11 हजार कार्ड बनाये जा चुके हैं।
ज्ञानपुर। विभागीय सूत्रों की माने तो प्राइवेट अस्पताल संचालक इस योजना के तहत उपचार में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह यह है कि उन्हें उपचार का पैसा इंश्योरेंस कंपनी की ओर से मिलता है। यह भुगतान बिल देने के बाद ही होगा। अस्पताल संचालकों को लगता है कि बिल भुगतान में काफी विलंब होगा, जिसका असर उनके कामकाज पर पड़ेगा। हालांकि इस बारे में कोई खुलकर कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। उनका कहना है कि उनके पास अब तक ऐसे मरीज ही नहीं पहुंचे हैं। वहीं वहीं सरकारी अस्पतालों में योजना के तहत उपचार की बेहतर व्यवस्था नहीं हैं।

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