भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकली वाणी है गीता

Bhadohi Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
गोपीगंज। सक्तेशगढ़ श्री परमहंस आश्रम के परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा कि आदि धर्मशास्त्र भगवान श्री कृष्ण के श्री मुख की वाणी गीता के श्रवण से मन के अंत:करण में शुभाशुभ संदेश प्रसारित होने लगते हैं। गीता के श्रवण करने और मनन करने से साधना पथ पर चलने वाले साधक को सद्गुरु मिलते हैं। गीता का श्लोक धर्म के अमृत हैं। जो व्यक्ति गीता के श्लोक में कही गई बातों का पालन करेगा वह सद्गुरु योगेश्वर को प्राप्त होगा। सक्तेशगढ़ आश्रम से इलाहाबाद जाते समय स्वामी जी ककराही के पास भक्तों को प्रवचन देते हुए कही।
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज भी आरक्षण में जी रहे थे। हम भी जी रहे हैं। इस बात को बहुत ज्यादा समय बीत जाने पर आज लोग जान रहे हैं। भारतवर्ष में आरक्षण का रोग बहुत ही पुराना रोग के रूप में है। राजस्थान में लोग सोने के आभूषण नहीं पहन सकते थे। रंगीन पगड़ी बांधने वाले अलग समुदाय के थे। सफेद पगड़ी अलग समुदाय के थे। समानता नहीं थी। अगर कुछ मांगना है तो भगवान से मांगो। सामान्य मनुष्य से नहीं। भगवान को जानने के लिए गीता का अध्ययन करना चाहिए। यह सब गीतोक्त साधना करने से मिलेगी अन्य विधि से नहीं। गीता धर्मशास्त्र के अनुसार मेरे भक्त चार प्रकार से मुझे भजते हैं। अति, अर्थार्थी, जिज्ञासु और ज्ञानी। मनुष्य की इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। स्वर्ग का सुख भोग लेने के बाद भी मनुष्य अपने को वहीं खड़ा पाता है। जहां से वह परमात्मा या सद्गुरु से मांगता हुआ खड़ा करता था। इसलिए संसार नश्वर है। दुखों का पहाड़ है जिसका कोई अंत नहीं है। संसार का शाश्वत एक मात्र परमात्मा है। जिसके अंश मनुष्य के शरीर में विराजमान है। जिनको जागृत करने के लिए गीता में वर्णित साधना करनी पड़ती है। यह सद्गुरु या महापुरुष के सानिध्य में रहकर उनके नित्यदर्शन मात्र से उनके कहे गए वचनों को ग्रहण करते हुए प्राप्त किया जा सकता है। साधना करते हुए साधक परमधाम, परमश्रेय, परमात्मा को प्राप्त कर लेता है जो मनुष्य के जीते जी प्राप्त होता है। उसी को मोक्ष कहा जाता है और यह कर्म यानी भजन से प्राप्त हो सकता है। गीता का सार ही सभी ग्रंथों का मूल है। इस मौके पर रामबाबू विश्वकर्मा, राजेश सोनकर, रमेश गुप्ता, गुलाब केशरवानी, अशोक विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार सर्राफ मंगू, सुरेंद्र गुप्ता, सदाचरण पाल, राकेश पाठक, अरुण यादव, बृजलाल मोदनवाल, डा. श्याम नारायण, ज्वाला प्रसाद विश्वकर्मा, धर्मराज पंजाबी, डा. दीनानाथ यादव, डा. बनवारी लाल यादव आदि थे। इसके पूर्व पं. मदन मोहन मालवीय विद्याश्रम के छात्रों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

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