रामलीला का जीवंत मंचन देख भाव विभोर हुए भक्त

Bhadohi Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। जिले के विभिन्न स्थानों पर चल रही रामलीला में लीला प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। देर रात तक लीला देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। इसके चलते संपूर्ण वातावरण श्रीराम मय हो गया है। कई रामलीला में रोचक प्रस्तुति करके जीवंत अभिनय किया जा रहा है। जिसे देख भक्त मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।
औराई में श्री आदर्श रामलीला कमेटी अमीरपट्टी में चल रही रामलीला में भारी भीड़ उमड़ रही है। रविवार को हुई रामलीला में प्रभु श्री राम ने नल और नील की सहायता से 100 योजन समुद्र पर पुल बांधकर रामेश्वर महादेव की स्थापना की। साथ ही महा विद्वान रावण को दक्षिणा के रूप में होने वाले महायुद्ध में धर्म युद्ध होने का वचन दिया।
रामलीला में दसवें दिन सेतु बांध की स्थापना और अंगद रावण संवाद की लीला दिखाई गई। समुद्र तट पर वानरी सेना को लेकर पहुंचे राम ने समुद्र से लंका तक जाने के लिए विनय किया, लेकिन समुद्र ने उनकी एक न सुनी। क्रोधित प्रभु राम ने ज्योंहि धनुष पर अग्निबाण चढ़ाया समुद्र देवता प्रकट होकर चरणों में शीश नवाकर कहा क्यों नहीं कार्य वह किया जाए जो युगों-युगों तक याद रहे, हो विजय श्री लंका पर मेरी भी मर्याद रहे। नल नील बड़े वरदानी हैं। पत्थर से सेतु बना देंगे। फिर मदद करेगा सागर भी पानी में पत्थर भी तैराएगा। पल भर में ही नल नील और समुद्र की सहायता से सौ योजन तक पुल का निर्माण करते हैं। राम की सेना जयकारा लगाते हुए लंका पहुंच गई और राक्षसों में कोहराम मच गया। भगवान ने विभीषण की सलाह पर दूत भेजकर रावण को समझाने का प्रयास किया। जामवंत के आदेश पर बालि के पुत्र अंगद को रावण के पास भेजा गया। अंगद ने निशाचरों का सामना करते हुए लंका पहुंचे। जिससे हनुमान के उत्पात से भयभीत हो चुके राक्षस रावण के पास पहुंच गए। अंगद को खड़े देख रावण के दरबार से अधिकांश राक्षस भाग खड़े हुए। अंगद ने रावण को बार बार नीति, धर्म और ज्ञान की बातें बताकर मातेश्वरी सीता को वापस करने के लिए कहा लेकिन पाप से ग्रसित रावण को बात समझ में नहीं आई वह अपने हठ पर दृढ़ रहा। अंगद ने रावण को ललकारा कि अगर मेरे एक पैर को लंका का कोई भी वीर टस से मस कर दे तो भगवान राम मातेश्वरी सीता को भूल जाएंगे। इस पर रावण खुश हुआ। मेघनाथ जैसे बलशाली योद्धा पैर को हिला तक नहीं सके। इस पर रावण स्वयं उठकर अंगद का पैर छूना चाहा, अंगद ने पैर हटा दिया और कहा कि भगवान श्री राम का पैर छुओ इसमें ही तुम्हारी भलाई है।
गोपीगंज संवाददाता के अनुसार गोपीगंज रामलीला समिति द्वारा रामलीला मैदान में चल रही लीला में लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। जामवंत आदि के द्वारा हनुमान को शक्ति याद दिलाने पर हनुमान समुद्र लांघकर लंका में पहुंचते हैं। वहां माता सीता का पता लगाने के बाद बजरंग बली ने अशोक वाटिका को उजाड़ना शुरू कर दिया। इससे राक्षसों में खलबली मच गई। मेघनाथ ने शक्ति का प्रयोग करते हुए हनुमान को रावण के सामने प्रस्तुत किया। विभीषण की सलाह पर रावण ने हनुमान जी की पूछ को जलाने का आदेश दिया। पूछ में आग लगते ही हनुमान जी ने पूरी लंका को आग के हवाले कर दिया। इससे सोने की लंका देखते ही देखते जल गई।

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