अहंकार प्रभु को स्वीकार्य नहीं: आचार्य

Basti Updated Sat, 25 Jan 2014 05:45 AM IST
बस्ती। साधारण मानव की तो बात छोड़ दें, अगर स्वर्ग के देवताओं के मन में अभिमान होता है तो वह प्रभु के दरबार में स्वीकार नहीं होता है। देवताओं को भी प्रभु के कोप का परिणाम भोगना पड़ता हैै।
ये सद्विचार जसईपुर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन आचार्य कृष्ण मणि त्रिवेदी ने उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किया। कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य ने कहा कि भगवान शुकदेव राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत के बारे में बताते हुए कहा कि दक्ष के अभिमान जन्म यज्ञ की गाथा, भगवती सती का महादेव रुद्र जी के वचनों पर अविश्वास करने का भयंकर परिणाम है। जब तक मनुष्य अभिमान का परित्याग कर ईश्वर की आराधना नहीं करता, तब तक उसे परम पिता परमेश्वर का दर्शन नहीं हो सकता। भगवान के चरणों में समर्पित करते हुए जगत कार्य करें तो उनकी भक्ति सदैव होती रहेगी। कहा कि कलियुग में भगवान का राम नाम लेने मात्र से ही मनुष्य का कल्याण होना है। परंतु आज का मानव समाज ईश्वर प्रेम में दो पल का समय नहीं निकाल पा रहा है। इस अवसर पर यजमान राम केवल, आज्ञा राम, राम विलास, चंद्र मणि त्रिपाठी, भोला नाथ, भगवान दीन पाल, रघुवर, मुन्ना आदि उपस्थित रहे।

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