गाेंडा जिले के दो उद्योग छोड़ रहे कुआनो और बिसुही में हानिकारक रसायन

Basti Updated Sat, 25 Jan 2014 05:46 AM IST
बस्ती। गोंडा जिले के दो उद्योगाें से निकले हानिकारक रसायनों से बस्ती की कुआनो और बिसुही नदियों का पानी प्रदूषित हो गया। इस कारण बड़े पैमाने पर मछलियां मर गईं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी की जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। इन उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
बता दें कि सोमवार को कुआनों का पानी प्रदूषित होने के कारण कई स्थानों पर मछलियां मरने लगीं। इस मामले में प्रभारी डीएम/सीडीओ आईपी पांडेय ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को नदी के पानी का नमूना लेकर उसकी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने का निर्देश दिया। प्रभारी क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ई. एके श्रीवास्तव और वैज्ञानिक सहायक अरुण कुमार श्रीवास्तव ने पगारे घाट के बिसुही नदी/कुआनों और अमहट घाट स्थित कुआनो के जल का नमूना लिया। टीम को सर्वेक्षण में बिसुही नदी का जल रंगीन एवं बिसुही नदी के कुआनों नदी में मिलने के बाद कुआनों नदी का पानी हल्का भूरा मिला। इसके अतिरिक्त टीम ने अइलाघाट, सोनहा, टिनिच और वाल्टरगंज के बीच स्थित कुआनों नदी का सर्वे किया। टीम को इन सभी स्थानों पानी का रंग भूरा मिला और मछलियां मरी हुई पाई गईं। नमूना विश्लेषण के लिए क्षेत्रीय कार्यालय उ. प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गोरखपुर भेज दिया।
इस संबंध में सीडीओ ने बताया कि जो रिपोर्ट उन्हें मिली है उसमें बभनान एवं दतौली मनकापुर स्थित इकाइयों से बिसुही/कुआनों नदी में हानिकारक रसायन डालने की बात कही गई है। इन दोनों इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई की भी सिफारिश की गई है। बताया कि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

फैजाबाद के क्षेत्रीय अधिकारी ने भी लिए नदियों के नमूने
कुआनो में जल प्रदूषण के चलते मछलियों के मरने की जानकारी बस्ती के प्रभारी की ओर फैजाबाद के क्षेत्रीय अधिकारी उ. प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी दी गई और उनसे भी जांच की सिफारिश की गई। क्षेत्रीय अधिकारी फैजाबाद राम गोपाल ने बताया कि वह और उनकी टीम ने कुआनों/बिसुही, बस्ती के बेलारे पुल, बभनान के घारीघाट, गोंडा के शृंगार घाट और अमघटी घाट के जल के नमूना लिए गए। साथ ही उसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। संग्रहित नमूने का विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कुआनो का डीओ शून्य होने से मरीं मछलियां
दोनों जनपदों के प्रभारियों का मानना है कि मछलियां मरने के पीछे दो कारण हो सकते हैं। पहला यह कार्य मछली माफिया का हो सकता है जो मछली का व्यापार करने के लिए पानी में रसायन डाल देते हैं, या फिर जो इकाइयां क्षमता से अधिक स्पेंट वाश निकाल रही हैं या खाद अधिक बना रही हैं। उसके कारण पानी प्रदूषित होता है। बताते हैं कि जब भी कोई प्रदूषित रसायन नदियों में डाला जाता है तो पानी का आक्सीजन कम होने लगता है जिसके कारण मछलियां या तो मरने लगती या फिर नदियों के किनारे आ जाती हैं। नदियों में आक्सीजन बना रहे इसके लिए जरूरी है कि घूलित ऑक्सीजन यानी डीओ चार मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। मगर विश्लेषण में कुआनो नदी में डीओ शून्य पाया गया। इसके चलते मछलियां मर गईं।

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