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दफ्तर नहीं पहुंचे सात अफसरों को नोटिस

Basti Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
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बस्ती। नवागत डीएम अनिल कुमार दमेले ने पहले ही दिन विकास भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण में अनुपस्थित मिले सात अधिकारियों को शोकाज नोटिस जारी करने के साथ ही साठ कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने का आदेश दे दिया।
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मंगलवार को सुबह दस बजकर दस मिनट पर डीएम विकास भवन जा पहुंचे। उन्होंने सीडीओ कक्ष में बैठकर सभी कार्यालयों की उपस्थिति पंजिका तलब की। उपस्थिति पंजिका में सात कार्यालयाध्यक्ष नियत समय पर आफिस नहीं पहुंचे थे। इनमें जिला युवा कल्याण अधिकारी प्रदीप कुमार, उपनिदेशक रेशम आरएन मल्ल, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. आरपी यादव, डीपीओ गायत्री सिंह, कार्यकारी अधिकारी मत्स्य देशराज, एआर कोआपरेटिव, सहायक अभियंता लघु सिंचाई शामिल रहे। डीएम ने कहा कि जब कार्यालयाध्यक्ष ही समय पर नहीं आएंगे तो कर्मचारियों को क्या संदेश देंगे। उन्होंने सातों अधिकारियों को शोकाज नोटिस जारी करने का आदेश दिया। साथ ही रजिस्टर में अनुपस्थित साठ कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश सीडीओ रामअरज मौर्य को दिया। चेतावनी दी कि दोबारा ऐसी स्थिति मिलने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


कार्रवाई में किया गया भेदभाव
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामआधार पाल का कहना है कि निरीक्षण के बाद कार्रवाई में अधिकारियों और कर्मचारियों में भेदभाव किया गया है। अधिकारियों को शोकाज नोटिस और कर्मचारियों का वेतन काटना गलत है। अगर समय पर कार्यालय न पहुंचने की दोनों की गलती समान है तो दंड भी समान मिलना चाहिए।
फील्ड में उतरें अधिकारी
बस्ती। नवागत डीएम ने अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच दफ्तर में बैठकर लोगों के प्रार्थनापत्रों को निपटाएं। जांच, भ्रमण आदि करना हो तो 12 बजे के बाद दफ्तर छोड़ दें। शासनादेश के हवाले से कहा है कि काम में सुस्ती गंभीरता से ली जाएगी।
पत्रकारों से बातचीत में डीएम ने कहा कि अधिकारी दफ्तर में बैठकर समस्याएं सुनेंगे तो निचले स्तर पर मामले सुलझ जाएंगे। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दशा पर हैरानी जाहिर की और गोदामों को मेंटेन कराने का दावा किया। बताते चलें कि इधर कुछ दिनों से अधिकारियों के बिना सूचना गायब रहने की शिकायतें काफी बढ़ गई हैं। कई विभागों में अफसर शाम को दफ्तर में बैठते हैं। दिन में आने वाले फरियादी वापस लौट जाते हैं। पहले ही दिन डीएम ने विकास भवन का जायजा लेने के बाद खुद देख लिया कि विभागाध्यक्ष के गैर मौजूदगी में मातहत बेलगाम हो जाते हैं। बकौल डीएम, इसे सख्ती से लिया जाएगा।

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