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भक्ति के बिना भगवान की प्राप्ति नहीं

Basti Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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बनकटी। श्रीरामाचार्य ने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहकर भी भगवान की प्राप्ति हो सकती है। शर्त यह है कि व्यक्ति के अंदर भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति हो। हम सभी का हृदय गोपियों की तरह निर्मल एवं शांत तथा भक्तिपूर्ण होना चाहिए। हम सभी को काम, क्रोध, लोभ, मोह व ईर्ष्या का त्याग करके सच्चे और निर्मल मन से कथा का श्रवण, सत्संग, आराधना, श्रद्धा और भक्ति से भगवान की प्राप्ति होने में कोई शंका नहीं रह जाती है। कथा श्रवण और सत्संग से वासना और अविद्या रूपी जो विकार मन में होते हैं, उनका सफाया होकर जीवन सुखमय हो जाता है।
दिल्ली से आए श्रीरामाचार्य ने सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भुवनी पाकरडाड़ में भक्तों को कथा का रसपान कराया। कथा ब्यास ने कहा कि भक्ति का सहारा लेकर हम सभी लोग भगवान को प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन जब तक हृदयरूपी कटोरा प्रेम रूपी आस्था से नहीं भरेगा तब तक भगवान की प्राप्ति संभव नही है। भगवद् भक्ति के कथा का श्रवण करने से हृदय पवित्र हो जाता है। आयोजक अवधेश कुमार पांडेय ने बताया कि कथा की पूर्णाहुति बृहस्पतिवार क ो होगी। इस अवसर पर चंद्रभान तिवारी, अनिल कुमार द्विवेदी, गिरीलाल, अजय पांडेय, मुखराम यादव, रामचंदर तिवारी, नरेंद्र प्रसाद पांडेय, पप्पू यादव, अजय शुक्ला, बब्बू शुक्ला आदि मौजूद रहे।

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