ठंड से बढ़ी डिमांड, मगर आपूर्ति बदहाल

Basti Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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बस्ती। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में कड़ाके की ठंड ने लोगों को ठिठुरने को विवश कर दिया है तो दूसरी तरफ विद्युत आपूर्ति के अनियमित शेड्यूल ने जीना मुहाल कर दिया है। बिजली न मिलने से व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिले में 105 मेगावाट खपत के बदले आधी ही बिजली कंट्रोल रूम से मिल रही है।
बिजली हर आम और खास की जिंदगी की प्रमुख जरूरत है। घरेलू कामकाज हो या कारोबार, बिजली बिन सब बेहाल है। इन दिनों अनियमित बिजली कटौती दिनचर्या पर विपरीत प्रभाव डाल रही है। सामान्य दिनों में जिले में कुल 105 मेगावाट बिजली की खपत है। इसके सापेक्ष कंट्रोल से बमुश्किल आधी ही मिल रही है। ऊपर से ठंड के कारण बिजली की खपत और भी बढ़ गई है। लोगों की उम्मीद को विभाग पूरा करने में विफल साबित हो रहा है। जितनी बिजली जिले को मिल रही है, इसमें से बस्ती क्षेत्र में 70 और हर्रैया में 35 मेगावाट की खपत है।

रोस्टरिंग का शेड्यूल
शहरी इलाके में इन दिनों रोस्टर के अनुसार दिन में 12-4 और फिर रात में दो घंटे की इमरजेंसी रोस्टरिंग लखनऊ सिस्टम कंट्रोल के आदेश पर किसी भी समय कर दिया जाता है। जबकि गांवाें रात 12 बजे से आठ बजे सुबह तक आपूर्ति दी जा रही है। आठ से दस बजे तक कटौती करने के बाद फिर दस से शाम छह बजे तक आपूर्ति का शेड्यूल है। इसके अलावा दो घंटे की इमरजेंसी रोस्टरिंग की जा रही है। इस लिहाज से शहरी इलाके में छह घंटे की कटौती और 18 घंटे आपूर्ति तथा गांवों में 16 घंटे आपूर्ति मिलनी चाहिए। लेकिन स्थिति इसके उलट है। शहर में बमुश्किल 10-12 और गांवों में 6-8 घंटे ही बिजली मिल रही है। इसको विभागीय अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं।

आपूर्ति न मिलने से कारोबार पर पड़ रहा विपरीत प्रभाव
ठंड के दिनों में जहां हर तरह के कारोबारी पर्याप्त बिजली न मिल पाने से परेशान हैं। सबसे अधिक मुसीबत बिजली के उपकरणों के कारोबारियों की है। शहर के गांधीनगर में बिजली के उपकरणाें की विक्रेता राजेश का कहना है कि बिजली न मिलने से चाहते हुए भी लोग रूम हीटर और ब्लोअर की खरीददारी नही कर रहे हैं। वेल्डिंग का कारोबार करने वाले कटरा के व्यापारी का कहना है कि उनका पावर कनेक्शन है। इसके लिए वे विभाग को हर महीने 3000-3500 रुपये का बिल भी अदा करते हैं। लेकिन पर्याप्त बिजली न मिलने से डीजल पर प्रतिदिन 300-350 रुपये अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है। इसको ग्राहक से मांगने पर भी नही मिलता। कहते हैं बिजली न होने से समय पर काम पूरा न कर देने पर ग्राहकों की खरी-खोटी भी सुननी पड़ती है।

खंड प्रथम में हैं 29 हजार से अधिक उपभोक्ता
विद्युत वितरण खंड प्रथम में अधिकांश इलाका शहरी है। इस खंड में लाइट फैन के 24 हजार, पावर के 600 और वाणिज्यिक 3500 के करीब उपभोक्ता हैं। शहरी इलाके में 20 घंटे आपूर्ति देने का आदेश है। लेकिन सरकारी रिकार्ड में 16-17 घंटे आपूर्ति के घंटे दर्ज किए जा रहे हैं। जबकि हकीकत कुछ और ही है। इन दिनों 12-14 घंटे ही बिजली मिल रही है। अधिशासी अभियंता एके राय का कहना है इस खंड के गांवों में सुबह दस बजे से शाम के 6 घंटे तक आपूर्ति का शेड्यूल निर्धारित है। जबकि शहरी इलाके में कटौती का समय दिन में 12-4 और शाम या रात में दो घंटे तय है। पीक टाइम में ओवरलोड के चलते लोकल फाल्ट की समस्या भी आ रही है। इस पर नियंत्रण का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

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