सरकार ने स्पष्ट नहीं की डैमेज चावल वैल्यू कट की परिभाषा

Basti Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
बस्ती। चावल डैमेज में एक फीसदी छूट को लेकर मिलर, केंद्र प्रभारी और किसान तीनों पशोपेेश में हैं। सरकार ने वैल्यू कट की स्थिति को स्पष्ट नहीं किया है। एक फीसदी कटौती किससे की जाएगी, इसे लेकर असमंजस है। मिलर इस लिए परेशान हैं कि कहीं उसके खाते से कटौती न कर ली जाए, केंद्र प्रभारी को यह आशंका सता रही है कि कहीं उनके वेतन से तो कटौती नहीं होगी। वहीं किसान इसे लेकर चिंतित है कि धान में न कहीं कटौती कर ली जाए। विभाग के अफसर भी कटौती को परिभाषित नहीं कर पा रहे हैं। मिलर एसोसिएशन ने स्थिति स्पष्ट न होने तक धान की कुटाई न करने का निर्णय लिया है। वहीं फूड एंड सप्लाई इंस्पेक्टर संघ ने मामले को खाद्य मंत्री के समक्ष उठाने की बात कही है।
बता दें कि मंडल में चावल में एफसीआई के मानक के विरोध में पिछले 10 दिन से धान की खरीद बंद है। इससे धान खरीद योजना प्रभावित हो रही है। किसान अपना धान बेचने के लिए परेशान हैं। स्थिति यह है कि मजबूरी में किसानों को तीन से चार सौ रुपये प्रति कुंतल नुकसान उठाकर धान बेचना पड़ रहा है। धान खरीद शुरू हो सके और चावल रिजेक्ट न हो, इसके लिए सरकार ने चावल के मानक में एक फीसदी छूट देने का निर्णय लिया है। 20 दिसंबर से लागू नए आदेश से एफसीआई को चार फीसदी तक डैमेज चावल लेना है। एक फीसदी की जो राहत दी गई उसे मिलर और केंद्र प्रभारी अपने ऊपर अतिरिक्त बोझ मान रहे हैं। राइस मिलर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष जेपी सिंह का कहना है कि डैमेज के नाम पर जो सरकार एक फीसदी वैल्यू कट करने जा रही है, वह किसके खाते से कटेगा यह स्पष्ट नहीं है। कहा कि अगर मिलर के खाते से कटेगा तो इसका नुकसान मिलरों को उठाना पड़ेगा। जबकि सरकार खुद मान रही है कि पूर्वांचल में डैमेज की मात्रा चार फीसदी है। सरकार पहले से ही नमी के नाम पर मिलर से एक फीसदी की कटौती कर रही है। इंस्पेक्टर संघ के अजय विक्रम मंडल अध्यक्ष कहते हैं कि अगर एक फीसदी की कटौती केंद्र प्रभारियों के वेतन से की जाएगी तो एमआई की कमर टूट जाएगी। वहीं भाकियू के मंडल अध्यक्ष दिवान चंद्र पटेल कहते हैं कि अगर सरकार किसानों के धान से एक फीसदी की कटौती करेगी तो संगठन आंदोलन करेगा। कहा कि सरकार इसी तरह की कटौती वर्ष 2010-11 में गेहूं में कर चुकी है।

एक ट्रक पर होगा 5400 रुपये का नुकसान
एफसीआई ने अगर चावल के डैमेज के नाम पर मिलरों से एक फीसदी वैल्यू कट शुरू की तो राइस मिलर को एक ट्रक में लगभग 5400 रुपये का नुकसान उठाना पडे़गा। मगर कहीं यह कटौती केंद्र प्रभारियों से की गई तो उनके वेतन से इतना ही रुपये कटेगा। यह कटौती सिर्फ एक लाट की है। बता दें कि अनलोडिंग के चलते इस बार एक ट्रक में 270 क्विंटल चावल का एक लाट बनता है। प्रति क्विंटल दो हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकार चावल का भुगतान करती है।

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