मिट्टी से ‘सोना’ पैदा कर रहे नगर के किसान

Basti Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
बस्ती। दुश्वारियों से जूझकर खेती से मुंह मोड़ने वाले खेतिहरों के लिए नगर बाजार की सब्जी की खेती काफी मुफीद साबित हो रही है। बल्कि यह खेती और किसानों के लिए प्रेरणादायक नजीर बनती जा रही है। ‘वेजिटेबल हब’ बनते जा रहे इस इलाके से शहर में होने वाली सभी सब्जियों की खपत का एक तिहाई हिस्सा यहीं से पूरा हो रहा है। करीब पचास किसान छोटी जोत होने के बावजूद शानदार उत्पादन कर रहे हैं।
वहां से रोजाना 150 से 300 कुंटल सब्जी बाजार में पहुंचाई जा रही है। किसान बताते हैं कि खेत में ही व्यापारी आकर माल उठा लेते हैं। यह धंधा इस लिए और भी लाभकारी बना हुआ है, क्याेंकि इसका पूरी तरह से नकदी में सौदा होता है। अन्य व्यवसाय की तरह न तो बाजार में पूंजी फंसने की झंझट और न वसूली में कोई खर्च। लागत का संकट भी कभी न होने से वहां के किसानों को सब्जी का धंधा खूब रास आ रहा है। आलू , मटर, गोभी, टमाटर, बैगन, सोया मेथी से लेकर करीब-करीब सभी सब्जियों की खेती की जा रही है। केवल इतना ही नहीं, वहां सब्जी की खेती में आठ सौ मजदूरों को रोजाना काम मिल रहा है। ऐसी खेती करने वाले किसान संसाधन बढ़ाना झंझट मानते हैं। उनका मानना है कि ट्रैक्टर आदि खरीदने पर उसे चलाने के लिए भी आदमी रखना पडे़गा। खुद इस लिए नहीं चलाते कि बाकी काम प्रभावित न हो। राधेश्याम बताते हैं कि संसाधन के नाम पर वह केवल पंपिंगसेट लगाए हैं। बाकी काम किराया देकर करा लेते हैं। उनके खेत से रोजाना 15 से 20 कुंटल सब्जी पैदा हो रही है। सिंचाई के लिए पूरे प्लाट में अंडर ग्राउंड पाइप लाइन बिछा दिए हैं। ताकि न तो पानी की बर्बादी हो और न ही नाली कटने से दूसरी फसल के नुकसान होने का डर। वहां के 10 एकड़ में सब्जी बोने वाले खेलई सोनकर बताते हैं कि जंगली जानवरों से सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। शिव पूजन, मुन्नी लाल, दिनेश सोनकर, नूरान माली का भी जीवन स्तर सब्जी की खेती करके ऊंचा उठ गया है।
ताजी की वजह से ‘खास’ नगर की सब्जी
दूर दराज से ढोकर लाई सब्जियां बदरंग भी होती हैं और उनकी ताजगी भी चली जाती है, लेकिन नजदीक होने की वजह से नगर बाजार की सब्जियों की खास मांग है। चाहे कंपनी बाग की सब्जी मार्केट हो या दक्षिण दरवाजा और रोडवेज की मार्केट, सब जगह नगर की सब्जी की सबसे अधिक मांग है।
पढ़ाई छोड़ 35 साल से उगा रहे सब्जियां
सब्जी की खेती के सफल माने जाने वाले किसान राधेश्याम बताते हैं कि हाईस्कूल में पढ़ाई छोड़कर सब्जी की खेती करने लगे। 35 साल हो गए, लेकिन अब इसे व्यापक रूप दे रहे हैं। सात-आठ हजार रुपये की लीज पर दूसरे का खेत लिए हैं।

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