हड़ताल को लेकर बंटे कर्मचारी

Basti Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
बस्ती। अनुसूचित जाति/जनजाति के कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण के सवाल पर जिले में शुक्रवार को कर्मचारी आंदोलन बंटा-बंटा नजर आया। अधिकतर कार्यालयों में कर्मचारी एकजुट होने के बजाए बिखरे दिखे। कुछ ने कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तो कुछ ने कार्यालयों में बैठकर रोजाना की तरह काम-काज निपटाए।
गुरुवार को राज्यसभा में नौकरियों में आरक्षण का बिल प्रस्तुत होने के बाद प्रदेश के 18 लाख कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की बात कही जा रही थी। मगर शुक्रवार को जिले में जो हालात दिखे उससे कर्मचारियों में इस मुद्दे को लेकर बिखराव साफ नजर आया। इस मुद्दे पर कर्मचारी दो धड़े में बंटे दिखे।
विकास भवन में विभागीय कर्मचारियों में से आधे ही हड़ताल के मूड में दिखे। मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं का कहना था कि वोट की लालच में समाज को तोड़ने और जाति व्यवस्था मजबूत करने की साजिश की जा रही है। जब नौकरी में आरक्षण का लाभ मिल गया तो प्रमोशन में इसकी क्या आवश्यकता। आंदोलन की अध्यक्षता करते हुए एसके नंदन ने कहा कि आरक्षण जन्म सिद्ध अधिकार नहीं है। इस मौके पर संदीप त्रिपाठी, शैलेंद्र चौधरी, दीपमणि शुक्ल, अजय श्रीवास्तव, मौजनाथ सिंह भूपेंद्र सिंह, ज्ञानेंद्र कुमार श्रीवास्तव, चंद्र प्रकाश चौधरी, अखिलेश शरण पांडेय, रहमत अली, अरुणेश पाल, ओमप्रकाश उपाध्याय, संजय श्रीवास्तव, हीरामन, रुद्रनाथ श्रीवास्तव, आलोक चौधरी, ईश्वर प्रसाद मिश्र, सुनील कुमार शर्मा आदि ने विरोध जताया। जबकि विकास भवन के अधिकतर कार्यालयों में कर्मचारी रोजाना की तरह शुक्रवार को भी काम करते रहे।
वहीं आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के आवाहन पर आरक्षण समर्थक अधिकारियों और कर्मचारियों ने न्याय मार्ग पर बैठक की। इसमें कहा गया कि वे प्रत्येक दिन चार घंटे अधिक सेवाएं दे रहे हैं। इससे प्रदेश सरकार की आवश्यक सेवाएं प्रभावित नहीं हो रही है। समिति ने मांग की है कि प्रदेश के सभी पिछड़े वर्गों अधिकारियों और कर्मचारियों को भी प्रमोशन में आरक्षण दिया जाय। बैठक में निर्णय लिया गया कि 16 दिसंबर को कलेक्ट्रेट पर आरक्षण समर्थक अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
इस मौके पर जनपदीय अध्यक्ष जानकी प्रसाद राव, एस आर कन्नौजिया, ज्ञानदास कन्नौजिया, विश्राम राव, अमरनाथ गौतम, रामसुरेमन, जगन्नाथ मौर्य, बालकृष्ण चौधरी आदि मौजूद रहे।

खुलकर नहीं आए कर्मचारी संगठन
प्रमोशन में आरक्षण के सवाल पर शुक्रवार को जिले में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के आंदोलन की उम्मीद थी, मगर कर्मचारी संगठनों के खुलकर इसमें शामिल न होने से कर्मचारियों में हड़ताल को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, राज्य कर्मचारी महासंघ, विकास भवन कर्मचारी संघ ने हड़ताल को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की।

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