यूरिया की खरीद में ठगे जा रहे किसान

Basti Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
बस्ती। रबी के सीजन में बीज के बाद किसान यूरिया के लिए ठगे जा रहे हैं। सरकारी केंद्रों पर यूरिया नदारद है और प्राइवेट दुकानदार मनमाना दाम वसूल रहे हैं। दाम अधिक देने के बाद भी किसानों को सही खाद नहीं मिल रही है। नई बोरियों में पुरानी खाद बेची जा रही है। रसीद भी किसानों को नहीं दी जाती और न ही दुकान पर रेट ही लिखा रहता है। कृषि विभाग और प्रशासन मिलकर भी किसानों को राहत नहीं दिला पा रहे हैं। किसानों ने इसे सरकारी तंत्र की नाकामी बताया है।
बहादुरपुर ब्लाक के ग्राम अठदमा के किसान कौशलेंद्र पांडेय कहते हैं कि जब वह सहकारी संस्था पाल नगर पर एमओपी पर खाद लेने गए तो उनसे 840 के स्थान पर 980 रुपए लिए गए। जब अमिलहा समिति पर गए तो वहां पर डीएपी के लिए 1206 के स्थान पर 1220 रुपये मांगे गए। जब अधिक कीमत लेने की बात उठाई तो जवाब मिला कि लेना हो लीजिए नहीं तो रास्ता नापिए। अधिकारियों से शिकायत का भी कोई असर नहीं पड़ा। रसीद मांगने पर भी नहीं दी गई। दुकान पर रेट बोर्ड भी नहीं लगा था। कहा कि नगर स्थित एक प्राइवेट दुकान से मजबूरी में यूरिया 301 के स्थान पर 460 रुपए में लेनी पड़ी। दुभरा चौबे निवासी राज कुमार चौबे कहते हैं कि किसानों को हर साल खाद और बीज के लिए धक्के खाना पड़ता है। बावजूद समय से और सही दाम पर खाद और बीज नहीं मिल पाता। प्राइवेट दुकानों पर तो अधिक दाम लिए ही जाते हैं। अब तो समितियों पर भी खुलेआम निर्धारित मूल्य से अधिक दाम लिए जा रहे हैं। शिकायत करने पर कोई कारवाई नहीं होती। चौबाहे के किसान लाल बहादुर ने व्यवस्था पर ही उंगली उठाई। कहा कि समितियों पर जो खाद और बीज आता है उसे अधिकतर दबंग और बड़े किसानों को धीरे से दे दिया जाता है। छोटे किसानों को तो खाद-बीज आने का पता ही नहीं चलता। कल आने को कह कर टाल दिया जाता है। किसानों को मजबूर होकर प्राइवेट दुकानों से अधिक दाम में खाद और बीज लेना पड़ता है। कहते हैं कि सुबह से ही समिति के खुलने का इंतजार कर रहा हूं। अठदमा ग्राम सभा के प्रगतिशील किसान अरविंद कुमार पांडेय कहते हैं कि अब तो किसानों को नए तरीके से ठगा जा रहा है। नई बोरियों में पुरानी खाद दी जा रही है। किसानों को इस बात का पता बोरी खोलने के बाद चल पाता है। शिकायत करने पर कहीं भी सुनवाई नहीं होती है। ऐसा लगता है कि इन लोगों को खुली छूट दे दी गई है। यूरिया 400 रुपए तक में किसानों को खरीदना पड़ रहा है।

आंकड़े कुछ और कहते हैं
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो खाद की कोई कमी नहीं है। विभाग इस बात का भी दावा कर रहा है कि इस बार सबसे अधिक समितियों को सक्रिय किया गया है। जिले में कुल 116 समितियां हैं, जिनमें 50 समितियों पर खाद और बीज उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। 43 हजार मीट्रिक टन के सापेक्ष 19305 उपलब्ध है। 15 हजार एमटी डीएपी के सापेक्ष जिले को 16660 एमटी मिल चुका है। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि एक-दो दिन में यूरिया की एक रैक बस्ती पहुंच रही है। खाद आवंटन करने वाली समिति ने सहकारी समितियों को 540 एमटी इफको को 150, गन्ना को 40, डीसीएफ को 50, क्रय विक्रय समिति को 50, पीसीएफ को 30, आईएफएफडीसी को 100, यूपी एग्रो को 50 एमटी यूरिया आवंटित की गई है। 90 एमटी यूरिया आरक्षित रखी गई है।

इन नंबरों पर करें शिकायत
बस्ती। खाद की अधिक कीमत लेने की शिकायत पर जेडीए अशोक कुमार कहते हैं कि वर्तमान समय में यूरिया की डिमांड अधिक है। कहा कि किसान जो भी बोरे पर अंकित धनराशि को देखकर ही खाद खरीदें। दुकानदारों से रसीद अवश्य लें। अधिक कीमत लेने वाले दुकानदारों की शिकायत मोबाइल नंबर 9451955645, 945065067 पर करें। कार्रवाई की जाएगी। बताया कि नीम कोट यूरिया का सरकारी मूल्य 315 रुपये प्रति बोरी है। यूरिया सामान्य का 300.86 रुपये निर्धारित है। इसी तरह डीएपी 1206 और एमओपी 840 रुपये प्रति बोरी सरकार ने तय कर रखी है।

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