मंत्री की चंगेरवा कोठी पर छाया सन्नाटा

Basti Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
कुदरहा। गुरुवार को चंगेरवा गांव में मरघट सा सन्नाटा है। यहां आने वालों का तांता लगा हुआ है लेकिन सबके मुंह सिले हुए थे। दो शब्द बोलना भी उन पर भारी पड़ रहा था। शब्द फूटते ही आंखें बरसने लगती थीं। न कोई कुछ बोलना चाह रहा था न कोई कुछ सुनना। तमाम लोग केवल शुभम की छवि की कल्पना में डूबे थे।
प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राज किशोर सिंह के बेटे शुभम की सड़क हादसे में मौत से लोग सदमे में हैं। राज किशोर सिंह पर तो गमों का पहाड़ ही टूट पड़ा है। उनके पैतृक गांव चंगेरवा में गुरुवार को ऐसी मायूसी छाई कि लोगों को निकलने क ा रास्ता तक नहीं सूझ रहा था। बताया जाता है कि चंगेरवा गांव ने कभी इस तरह दिल दहला देने वाली दर्दनाक मौत का मंजर नहीं देखा था। इस घटना से हर कोई दहल गया है। गुरुवार को सुबह से ही लोग चंगेरवा पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को उन्हें ढाढ़स बंधाने लगे। लोगों की आंखें यह सोचकर भी नम हो जा रही थीं कि जो व्यक्ति रोज सैकड़ों व्यक्तियों खुश किए रहता था वही आज इस कदर बेबस और लाचार है। शब्द निकलते ही उसका गला रुंध जा रहा है।

भगवान बेटे के बदले मेरी सारी उपलब्धि ले लेते तो भी उफ न करता
उद्यान मंत्री की जुबान जब भी किसी के सामने खुली तो वह यही कह रहे थे कि अपने राजनीतिक जीवन में कभी किसी का बुरा नहीं किया। जब भी कोई किसी जरूरत से उनके पास आया तो उन्होंने उसकी समस्या के निराकरण के लिए प्रयास किया। फिर भी ईश्वर ने मेरे बेटे को मुझसे छीन लिया। भगवान बेटे के बदले मेरी सारी उपलब्धि ले लेते तो भी मैं उफ नहीं करता।

सोना और कृष्णा के मासूम हाथ भी नहीं रोक पा रहे डैडी के आंसू
बड़ों के अलावा घर में डिंपल की छह वर्षीय बेटी सोना और चार वर्षीय बेटा कृष्णा भी मौजूद हैं। इनमें शुभम की मौत की समझ शायद नहीं है फिर भी वे खेलते खेलते भीड़ में घुसकर कभी बड़े डैडी तो कभी डैडी की आंखों से बहते आंसू को पोंछने का असफल प्रयास करते हैं। मासूम बच्चों की प्रेम भरी इस हरकत से आंसू तो थम नहीं रहे है बल्कि आंसुओं का वेग और बढ़ जा रहा है।

पोते के गम में झुक गए दादा के फौलादी कंधे
जीवन में संघर्ष से कभी न घबराने वाले व्यक्ति के रूप में अनंत सिंह की पहचान है। बेटे के मंत्री बनने में उनके योगदान के सब कायल हैं। यही नहीं वे टूटना जानते थे पर झुकना नहीं। पर सबसे प्यारे पोते शुभम को मुखाग्नि देने के लिए झुका कंधा दूसरे दिन भी सीधा नहीं हो पाया। उनके हर पल साथ रहने वाले मामा भगवान सिंह, जिलाजीत सिंह, पूर्व प्रधान रामउग्रह सिंह एवं पप्पू सिंह का मानना है कि अपने पूरे जीवन में अनंत सिंह कभी इतने कमजोर नहीं दिखे। कल तक जवानों का जज्बा रखने वाले अनंत सिंह में बुढ़ापा साफ झलकने लगा है।

शुभम के दरियादिली के सब कायल
शुभम की मौत से उसके साथियों की आंखें भी छलक रही हैं। शुभम की दरियादिली के सब कायल हैं। पॉकेट खर्च के नाम पर मिलने वाले धन को अपने मित्रों में बांटकर खुशियां बिखेरने की उसकी आदत थी। लखनऊ हो या उसका घर। हर जगह अपने हमउम्र मित्रों की मदद करने में वह कभी पीछे नहीं रहता था। हर पल उनके साथ रहने वाले मंटू, राविन सिंह, रजनीश, नितिन और राजाबाबू का कहना है कि वह जब भी मिलता था तो मित्र की तरह। कभी भी मंत्री का बेटा होने का दंभ उसमें नहीं दिखा।
खास-ओ-आम के पहुंचने का सिलसिला जारी
बस्ती। उद्यानमंत्री राज किशोर सिंह के पैतृक निवास चंगेरवा में गुरुवार को लोगों के पहुंचने का सिलसिला चलता रहा। पूरे दिन वीआईपी गाड़ियां आते-जाते देखी गईं।
प्रमुख रूप से विधान सभाध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, कृषि मंत्री आनंद सिंह, आजम खां, पूर्व मंत्री पंडित सिंह, अयोध्या के विधायक पवन पांडेय, तरपगंज गोंडा विधायक मंजू सिंह, अलगू चौहान, पूर्वमंत्री राम प्रसाद चौधरी, पूर्व चेयरमैन अशोक सिंह के अलावा पूर्व विधायक ईश्वरदेव शुक्ल, अंबिका सिंह, राम जियावन, विजय सेन सिंह, अवधेश सिंह, राणा सिंह आदि राज किशोर सिंह के परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे।

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