कछुआ चाल चल रही धान की खरीद

Basti Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
बस्ती। किसानों के हितों के लिए बनाई गई धान खरीद योजना सरकार की खराब नीति और एफसीआई के असहयोग के चलते विफल होने की कगार पर है। 66 दिनों में मात्र नौ फीसदी की खरीद हुई। जबकि यही खरीद पिछले वर्ष 40 फीसदी की थी। बकाए का भुगतान करने को कौन कहे, खरीद एजेंसियों के पास इतना धन नहीं है कि वे किसानों का धान खरीद सकें। बकाए की धनराशि बढ़कर सात करोड़ तक पहुंच पहुंच चुकी है। इसके चलते एजेंसियों ने खरीद करना ही बंद कर दिया है। मजबूरी में जरूरतमंद किसानों को औने-पौने दर में बिचौलियों के हाथों धान बेचना पड़ रहा है। प्रशासन और विभाग के अफसरों को कम खरीद, भंडारण और बकाए की समस्या को लेकर दो-चार होना पड़ रहा है।
किसानों की मानें तो मंडल में धान खरीद योजना का लाभ किसानों को दिलाने में सरकार विफल है। बनकटी के किसान रामचंद्र चौधरी कहते हैं कि योजना का लाभ मिलने को कौन कहे, खरीद तक नहीं हो रही है। केंद्र खुले हैं तो उनके पास धान खरीदने को पैसा नहीं है। यहीं के किसान लालचंद्र यादव का कहना है कि सरकार अगर किसानों का धान खरीद करवा ले, वही बड़ी बात है। बकाए का भुगतान कराना और निर्धारित दर दिलाना तो दूर की बात है। दुबौलिया के प्रगतिशील किसान दलबीर सिंह चौधरी कहते हैं कि सरकार की खराब नीति का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार न समय से भुगतान करा पा रही है और न समय से खरीद ही करवा पा रही है।

17 हजार मीट्रिक टन की हुई खरीद
बस्ती। विभागीय आंकड़े गवाह हैं कि मंडल में धान खरीद की स्थित दयनीय है। मंडल में 1.82 लाख मीट्रिक टन धान खरीद करने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें पांच दिसंबर तक कुल 17081 मीट्रिक टन की खरीद हुई। यानी लक्ष्य के सापेक्ष कुल खरीद नौ प्रतिशत की हुई। इसमें बस्ती ने 7262 एमटी, संतकबीरनगर में 7528 और सिद्धार्थनगर में 2291 मीट्रिक टन की खरीद हुई, जिसमें बस्ती के राइस मिलों को 1697 मीट्रिक टन, संतकबीरनगर के 3187 तथा सिद्धार्थनगर के मिलों को 80 मीट्रिक टन सहित कुल 4964 मीट्रिक टन धान कूटने के लिए दिया गया। मिलों ने अब तक एक भी दाना धान कूटकर नहीं दिया। केंद्रों पर अभी भी 12117 मीट्रिक टन धान केंद्रों पर डंप है।

कब होगा 6.63 करोड़ का भुगतान
बस्ती। मंडल में सरकारी केंद्रों पर अब तक 3725 किसान 14.73 करोड़ रुपये का एक लाख 70 हजार कुंटल से अधिक कीमत का धान बेच चुके हैं। खरीद के सापेक्ष धान क्रय वाली एजेंसियों ने 8.10 करोड़ का ही भुगतान कर सकी है। किसानों का एजेंसियों पर अभी भी 6.63 करोड़ रुपये का बकाया है। बस्ती में 1.84 करोड़, संतकबीरनगर में 4.09 करोड़ और सिद्धार्थनगर में 70 लाख का बकाया है। खरीद का 45 फीसदी बकाया है। बकाए का भुगतान कब होगा यह बताने वाला कोई नहीं है।

एफसीआई के चलते नहीं हो रहा भुगतान
बस्ती। धान खरीद और बकाए को लेकर खाद्य विभाग के आरएमओ राममूर्ति वर्मा सहित पीसीएफ, यूपी एग्रो, यूपीएसएस, नेफेड और राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के क्षेत्रीय अधिकारी कहते हैं कि विभाग ने खाद्य विभाग को छोड़कर अन्य केंद्रों पर खरीद के लिए प्रत्येक केंद्रों पर पांच-पांच लाख रुपये दिए थे। जितना धन मिला, उतना भुगतान कर दिया गया। चूंकि एफसीआई चावल का भंडारण नहीं कर रही है, जिसके चलते भुगतान का रोटेशन प्रभावित हो रहा है। अफसरों ने विभागों से और अधिक धनराशि मांगने की बात कही है।

Spotlight

Most Read

Kushinagar

गंदगी के बीच खड़ा होकर पकड़ना पड़ता बस

पडरौना। यात्री प्रतीक्षालय ऐसा कि वहां पर बैठकर इंतजार नहीं किया जा सकता। गंदगी चारों तरफ फैली रहती है, जिससे वहां पर खड़ा होना मुश्किल रहता है। गंदगी के बीच ही खड़ा होकर लोगों को बस पकड़ना पड़ता है।

20 जनवरी 2018

Related Videos

ट्रेन में कर रहा था पाकिस्तान से जुड़ी ऐसी बाते, पुलिस ने लिया हिरासत में

मुंबई से गोरखपुर जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस ट्रेन में सफर कर रहे एक संदिग्ध शख्स को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस को ये शिकायत ट्रेन में बैठे एक पैरा मिलिट्री के जवान की ओर से मिली थी।

12 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper