पछुआ हवाओं ने बढ़ा दी गलन

Basti Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
बस्ती। पश्चिमी विक्षोभ ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसकी बानगी बुधवार को हल्की बदली के रूप में मिल गई। हल्के पछुआ हवाओं ने 24 घंटे के भीतर दिन का तापमान दो डिग्री सेल्सियस नीचे गिरा दिया है। जानकारों ने एक-दो दिन में धुंध और कोहरा भी शुरू होने का अनुमान लगाया है। संभव है कि एक-दो दिन बाद से सुबह गुनगुनी धूप का आनंद लेने के लिए नौ बजे तक या इसके बाद तक इंतजार करना पडे़।
कोहरा और बदली न होने से अब तक महसूस हुआ कि पिछले साल की तुलना में इस बार ठंड में देर है। मगर हकीकत में ऐसा नहीं है। पांच नवंबर 2011 को अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस था। जबकि इस बार पांच दिसंबर को न्यूनतम तापमान उससे आधा यानी 7.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। हालांकि इस बार दिन में अच्छी धूप होने की वजह से अब तक अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरा। मौसम विशेषज्ञों का आकलन बता रहा है कि अब यह अंतर मिटेगा। इसी हफ्ते दिन के तापमान में भी जबरदस्त गिरावट होगी। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के प्रोफेसर पद्माकर त्रिपाठी के मुताबिक अब ठंड बढ़ने का वक्त आ गया है। इधर हल्की बदली भी रहेगी और कोहरा भी पड़ने लगेगा। हालांकि अभी घना कोहरा छाने की संभावना कम है। इसके चलते दिन के तापमान में गिरावट आएगी। आर्द्रता भी बढ़ जाएगी। हालांकि अभी दिन भर शीतलहरी की संभावना कम है।

देर के नाते मिल रही डांट
गलन बढ़ने के साथ ही बच्चों और गृहणियों की सांसत बढ़ रही है। सुबह का रोजमर्रा का काम करने में असुविधा होने लगी है। ठंड की वजह से स्कूली बच्चों स्कूल के लिए तैयार होने में देर होने लगी है। क्लास में बच्चे देर होने की वजह से डांट खाने लगे हैं।

जैसे-तैसे कर रहे ठंड का बचाव
सरकारी स्तर पर अलाव की व्यवस्था न होने के चलते लोग निजी संसाधनों से अलाव जलाकर ठंड से बचने का प्रयास करते देखे जा रहे हैं। यूं तो पिछले एक सप्ताह से ठंड पड़ रही है। मगर रविवार की रात से यह और तेज हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पुआल, गोंइठा, पेंड़ के पत्ते और लकड़ी जलाकर ठंड दूर करने में लगे हैं। ठंड के चलते मजदूरी के लाले पड़ गए हैं। मजदूरों को काम ने मिलने से उनके घरों का चूल्हा प्रभावित हुआ है।

ठंड बढ़ी तो आलू और दलहन पर खतरा
मौसम में छाई बदली का मौसम पर मिलाजुला असर होगा। आलू समेत दलहनी फसलों के लिए बदली नुकसानदेह साबित होगी। वहीं गेहूं, जौ जैसी फसल के लिए ऐसा मौसम काफी फायदेमंद होगा। कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया के वैज्ञानिक डाक्टर एसएन सिंह के मुताबिक बूंदाबांदी के साथ धूप होने पर आलू में झुलसा रोग होने का खतरा अधिक होता है। मटर, अरहर समेत दलहनी फसलों में उकठा रोग फैल सकता है। डॉक्टर सिंह के मुताबिक आलू को झुलसा से बचाने के लिए ‘मैंकोजेब’ 78 प्रतिशत दवा की ढाई किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

बढ़ी ऊन की डिमांड
बस्ती। ऊन व्यापारियों का नवंबर मायूसी में बीता, मगर दिसंबर के पहले हफ्ते में दुकानदारों के चेहरे खिल गए। दो दिनों से कोहरे से बढ़ी ठंडक का असर ऊन की दुकानाें पर देखने को मिला। पक्के बाजार की दुकानों पर ग्राहकों की खासी भीड़ दिखी। रंग-बिरंगे ऊनाें के खरीदार पहुंचे। वहीं कुछ दुकानदार मौसम की नजाकत को देखते हुए सामान की पूर्ति के लिए आर्डर देने से नहीं चूके।

नन्हीं जान का रखें ख्याल
बस्ती। एकाएक बदला मौसम बीमारी का घर है। छोटी-बीमारी की गिरफ्त में लोगों के आने का डर बना रहता है। नन्हीं जान के लिए यह मौसम काफी नुकसानदायक है। इसका असर जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में देखने को मिला। बीमार मासूमों के आगे बेड कम पड़ गई है। बुधवार को वार्ड में तकरीबन 45 से अधिक मरीज भर्ती रहे। इनमें अधिकांश को बदले मौसम में निमोनिया और डायरिया की शिकायत थी। डॉक्टर भी इस मौसम में बच्चाें का खास ख्याल रखने की सलाह देते हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके गौड़ ने बताया कि बच्चों का शरीर बदले मौसम में अपने को ढाल नहीं पाती है। इसलिए उनका खास ख्याल रखना चाहिए। बच्चाें को ठंड से बचाना चाहिए।

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