कल्चर के नाम पर वसूली के खिलाफ भड़के किसान

Basti Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
बस्ती। कृषि विभाग के गोदाम से प्रति पैकेट गेहूं के बीज पर तीस रुपये अतिरिक्त वसूली के खिलाफ मंगलवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों के हंगामे के बाद कल्चर का पैकेट भी बांटा जाने लगा।
शहर के कृषि विभाग के गोदाम पर मंगलवार को गेहूं का बीज बंट रहा था। किसानों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। गेहूं के बीज के लिए किसान पैसे जमा कर पर्ची बनवा रहे थे। आसपास खडे़ कुछ किसान आपस में बात कर रहे थे कि आखिर जब कल्चर नहीं दे रहे हैं तो 30 रुपये बीज का दाम अधिक क्यों लिया जा रहा है? बमुश्किल पांच मिनट बाद ही एक किसान का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद सभी किसान आक्रोशित होकर हंगामा करने लगे। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाने लगे। काउंटर के अंदर से पर्ची काट रहे कर्मचारी और बाहर खडे़ किसानों में ‘देख लेने’ तक की बात होने लगी। लेकिन किसानों के तेवर देख कृषि विभाग के कर्मचारी कल्चर भी बांटने लगे। सेमरा चीगन निवासी प्रमोद पांडेय का कहना था कि कर्मचारी कल्चर के नाम पर 30 रुपये अधिक वसूल रहे हैं। वे फोन पर गोदाम के प्रभारी किसी पासवान से बात करने लगे। लेकिन फिर भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ। वहां मौजूद तमाम किसानों को पहले तो यह जानकारी ही नहीं थी कि उनसे अधिक दाम लिया जा रहा है। लेकिन जब पता चला तो वे भी खुद को ठगा महसूस करने लगे। इस संबंध में जेडीए अशोक कुमार का कहना है कि किसानों को समझाया जाना चाहिए कि कल्चर उनके लिए जरूरी है। अगर कर्मचारी केवल रुपये ले रहे हैं और कल्चर नहीं दे रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

नहीं मिल रहा है मनपसंद वेराइटी का बीज
किसानों को उनकी पसंद की गेहूं बीज की वैराइटी नहीं मिल रही है। सबसे अधिक लाल बाली वाली प्रजाति के बीज की डिमांड है। लेकिन सरकारी गोदामों पर यह वैराइटी नहीं है। बाजार में 20 किलो के पैकेट की कीमत आठ से नौ सौ रुपये है। कृषि विभाग के गोदाम से मायूस लौटे किसान कृषि विभाग के कंपनी बाग स्थित मुख्य वितरण केंद्र पर मंगलवार को तमाम किसान पहुंचे थे। कतार लंबी देख कुछ किसान मायूस हो रहे थे। पिपरा गौतम निवासी प्रदीप कुमार बताते हैं कि पीबीडब्लू 343 के लिए सुबह से लाइन लगाए हैं। नंबर कब आएगा इसका कोई पता नहीं है। सल्टौआ निवासी मोहम्मद इद्रीस बताते हैं कि वे बीज के लिए तड़के ही घर से निकल गए थे। कुछ खाए पीए भी नहीं। ताकि आसानी से बीज मिल जाए। लेकिन लाल बाली वाला बीज नहीं मिला। कुदरहा क्षेत्र के पसड़ा निवासी राम शब्द को भी लाल बाली का बीज चाहिए था। पर न मिलने पर 373 वैराइटी ले गए। साऊंघाट क्षेत्र के पिपरा चंद्रपति निवासी राहुल यादव का कहना है कि पीबीडब्लू 550 गेहूं का बीज खरीदे हैं। लेकिन कल्चर नहीं मिला। परसा तकिया निवासी सबरुननिशा व कमरुनिशा भी लाल बाली का बीज खोजते गोदाम तक पहुंच गईं। उनका कहना था कि उनके पास कम जमीन है। इसलिए अधिक पैदावार देने वाला बीज ढूंढ़ रहे हैं।

366373 हेक्टेअर में होनी है गेहूं की बुआई
मंडल में वर्ष 2012-13 में 366373 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई का लक्ष्य रखा है। बस्ती में 116362 हेक्टेअर, संतकबीरनगर में 92259 हेक्टेअर व सिद्धार्थनगर में 157755 हेक्टेयर गेहूं बोने का लक्ष्य है। जबकि वर्ष 2011-12 में 360722 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं बोया गया था। इसमें बस्ती में 113897 हेक्टेयर, संतकबीरनगर में 89957 और सिद्धार्थनगर में 156918 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं बोया गया था। इस बार 5601 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अधिक गेहूं की बुआई का लक्ष्य रखा गया हेै।

मंडल में बीज की नहीं है कमी
मंडल में रबी वर्ष 2012-13 में गेहूं के बीज का लक्ष्य 208490 कुंटल का है। इसमें विभिन्न संस्थाओं के लिए 101490 कुंटल रखा गया है। जबकि निजी/अन्य के लिए 107000 कुंटल दिया गया है। संस्थाओं में 56620 और निजी क्षेत्र में 71314 कुंटल सहित कुल 127934 कुंटल बीज उपलब्ध है। इसमें 24989 कुंटल का वितरण भी हो चुका है।
जौ बीज: सीजन का लक्ष्य 380 कुंटल का है। उपलब्धता 215 कुंटल की है। जेडीए अशोक कुमार ने बताया कि विभाग पहली बार पीबीडब्लू 509 नामक गेहूं की नई प्रजाति किसानों को दे रहा है। किसान इस प्रजाति की बुआई कर प्रति हेक्टेयर 55 कुंटल गेहूं का उत्पादन पा सकते हैं। जबकि अन्य प्रजाति से 35 से 40 कुंटल गेहूं का ही उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विभाग इस प्रजाति पर किसानों को 900 रुपये प्रति कुंटल अनुदान भी दे रहा है। यह गेहूं 135 दिनों में ही तैयार हो जाता है। मंडल को 300 कुंटल बीज मिल भी चुके हैं।

सूक्ष्म तत्वों को मेंटेन करने की जरूरत
उप निदेशक कृषि रक्षा डाक्टर पीके कनौजिया के मुताबिक, मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की कमी से उत्पादन तो प्रभावित होगा ही साथ ही दाने कमजोर होंगे और उनमें चमक नहीं होगी। उनके मुताबिक नाइट्रोजन की कमी से जडे़ कमजोर हो जाती हैं। जबकि फास्फेट की कमी से पौधों का विकास रुक जाता है। फसल देर से पकती है और दाने भी छोटे रह जाते हैं। पोटाश की कमी से दाने कमजोर होते हैं और उनमें आकर्षण नहीं होता। इसलिए बाजार में उसका अच्छा रेट नहीं मिल पाता है। सल्फर की कमी से तिलहनी फसलों में तेल की गुणवत्ता बढ़ जाती है। इसके अलावा फसल को ऊर्जा मिलती रहती है।

विशेषज्ञों की काम की सलाह
: अधिकतर सूक्ष्म तत्वों को पूरा करेगा जिप्सम।
: सीड ड्रिल से बुआई करने पर बडे़गी पैदावार।
: बीज के साथ फास्फेटिका का करें इस्तेमाल।
: खेत में कभी भी न जलाएं खर-पतवार।
: जीवांश यानी गोबर की खाद, मुर्गी की खाद और हरी खाद का प्रयोग करें।

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