मिश्रौलिया में रहते हैं झुग्गी वाले ‘अमीर’

Basti Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
बस्ती। दो साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती नगरपालिका के वार्ड नंबर एक मिश्रौलिया पहुंचीं तो वहां के झुग्गी-झोपड़ी वाले दलित बिरादरी के लोगोें को लगा कि अब उनके दिन बहुरेंगे। उस दौरान आला अधिकारियों ने लच्छेदार बातें करके तंगहाल लोगों की जुबान पर ताला जड़ दिया। ताकि वे मुखर न हो जाएं। कहा गया था कि सभी सरकारी योजनाओं से मोहल्ले को आच्छादित कर दिया जाएगा। लेकिन हकीकत का सामना हुआ तो उन्हें लगा कि उनसे छल हो गया। सत्ता के साथ प्राथमिकता बदलने वाले नौकरशाहोें की नजर में यह मोहल्ला भले ही उपेक्षित हो गया हो लेकिन अधिक वक्त नहीं बीता है जब मोहल्ला न केवल तत्कालीन मुख्यमंत्री बल्कि नौकरशाहों के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा था। आइए देखें एक तस्वीर...।
जहां देखें समस्याओं का अंबार
मोहल्ले में करीब-करीब सभी योजनाओं का बुरा हाल है। पूरे मोहल्ले में जगह-जगह समस्याओं का अब भी अंबार लगा हुआ है। नालियां जाम हैं, स्ट्रीट लाइट में कहीं बल्ब गायब है तो कहीं सोडियम लाइट नहीं जलती। कई जगह तो दिन में भी लाइट जलते मिल जाएगी। पाइप लाइन फटने की वजह से वाटर सप्लाई का पानी बेकार में बह रहा है। मोहल्ले के सुंदर, किसलावती, रतन का कहना है कि तब अधिकरी आकर तमाम लच्छेदार बातें करते थे। कहते थे कि सरकार की सब योजना का लाभ दिया जाएगा। पर आज कोई पूछने वाला भी नहीं है।
जर्जर तार कभी भी कर सकते हैं हादसा
मलिन बस्ती के रुप में चिन्हित मिश्रौलिया मोहल्ले में बिजली का तार जर्जर हो चुका है। कई बार अपने आप तार टूट कर गिर चुके हैं। कई लोगों के मकान के सामने ही एक तार के सहारे सप्लाई हो रही है। सभासद प्रत्याशी रहे सोमनाथ सोनकर बताते हैं कि प्रमुख सचिव शशंाक शेषर सिंह के दौरे के समय मोहल्ले के लोगों ने यह मांग उठाई थी। मौके पर मौजूद बिजली विभाग के एक्सईएन एके राय ने 22 लाख का इस्टीमेट बताया। मोहल्ले में लगा 250 केवीए के ट्रांसफारमर की जगह 450 केवीए का ट्रांसफारमर लगाने का भी प्रस्ताव था। प्रमुख सचिव ने तत्काल धनराशि की स्वीकृति दे दी थी लेकिन अब तक तार नहीं बदले गए।
यह देखिए गरीबों के अमीरी का प्रमाणपत्र
मिश्रौलिया मोहल्ले के डफाली टोल निवासी दलित बिरादरी के शोहरत पुत्र प्यारे लाल के पास न मकान है न रोजगार। पटरी पर सब्जी बेचकर अपने कुनबे का पेट भरते हैं। मगर फूड एंड सप्लाई विभाग की नजर में वे अमीर हैं। 16 मार्च 2010 को राशन कार्ड संख्या 277756 जारी किया गया लेकिन गरीबी रेखा से नीचे का नहीं बल्कि ऊपर यानि पीला कार्ड जारी किया गया। वह बताते हैं कि इस कार्ड से उन्हें कोई सुविधा नहीं मिलती। चार बेटों में दो की शादी हो चुकी है। 10 सदस्यों के इस परिवार की माली हालत बिगउ़ती जा रही है। इसी तरह राम सागर पुत्र रंगीलाल को भी 274816 एपीएल कार्ड जारी होने के नाते कोई सुविधा नहीं मिल रही है। उसी के बगल रहने वाले रमेश के पास कोई कार्ड ही नहीं है। रमेश का कहना है कि उनके सभी भाई और पिता अलग-अलग रहते हैं। लेकिन केवल पिता के नाम कार्ड बना है।
पूरे मोहल्ले का फिर से होगा सर्वे: एडीएम
एडीएम राम एकबाल सिंह का कहना है कि इस बावत जानकारी मिली है। डीएसओ को निर्देश दिया गया है कि पूरे मोहल्ले का सर्वे कराकर जो भी पात्र हो उसे बीपीएल कार्ड आवंटित किया जाए। रही बात बाकी समस्याओं की तो उसके बारे में भी कार्रवाई का निर्देश दिया जा रहा है। वे किसी दिन स्वयं जाकर मौका देखेंगे।

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