पर्व की मिठास पर मिलावटखोरों की नजर

Basti Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
बस्ती/गौर। दीपावली करीब आते ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। मिलावटी खोवे की खेप स्थानीय बाजारों में पहुंचने लगी है। धंधेबाज रोडवेज बसों को ट्रांसपोर्टेशन का प्रमुख साधन बना रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग व परिवहन निगम की लचर कार्यशैली का इन्हें फायदा मिल रहा है।
जानकारों का मानना है कि मिलावटखोरों के तार सीधे कानपुर की मंडी से जुड़े हैं। कानपुर से रोडवेज बसों में लाद कर बस्ती मुख्यालय के अलावा आसपास के कस्बाें में माल खपाए जाते हैं। डिपो के सामने स्थित खोआ मंडी से जुड़े कारोबारी और जिले के बड़े मिठाई के दुकानदार सीधे कानपुर मंडी से अपना माल मंगाते हैं। इनके लिए रोडवेज की बसें मुफीद होती हैं। आसानी से इन पर किसी की नजर नहीं पड़ती। चालकों व परिचालकों की मिलीभगत से माल निर्धारित स्थानों पर उतार दिए जाते हैं। जब कभी खाद्य विभाग के निरीक्षक छापेमारी करते हैं तो रोडवेज कर्मचारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि उन्हें क्या पता कि खोआ असली है या मिलावटी। बभनान कस्बे में सोमवार की सुबह गोंडा डिपो की बस से करीब दो कुंतल मिलावटी खोआ उतार कर बाजार में भेज दिया गया। यहां पर न तो खाद्य विभाग की टीम पहुंची और न ही स्थानीय थाने की पुलिस। धंधेबाजों ने माल पहले से नियत दुकानाें पर पहुंचा भी दिया। कस्बे के अलावा मनकापुर, गौरा चौकी, छपिया, सहदुल्लाहनगर बाजार में मिलावटी खोवे की खेप पहुंचाई जाती है।

त्योहाराें से पूूर्व चलता है अभियान : सीएफओ
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी उमेश प्रताप सिंह कहते हैं कि हर बार त्योहाराें से पूूर्व मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। एडीएम के निर्देशन में विभाग ने बीते साल कुल 19 मिलावटखोराें को पकड़ कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इनमें से चार का निर्णय भी हो चुका है। इनसे दो लाख 70 हजार रुपये जुर्माना अदा कराए गए हैं। शेष का निर्णय भी जल्द ही आने की उम्मीद है।

जुर्माने और सजा का है प्रावधान
खाद्य पदार्थ अधोमानक पाए जाने पर 5 लाख रुपये जुर्माना, खाद्य पदार्थ में अपमिश्रण के मामले में तीन लाख और मानव जीवन के लिए खतरनाक मिलावट करने वालों के खिलाफ 2 से 10 लाख रुपये जुर्माना और 6 माह से आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

कैसे करें मिलावट की पहचान
नकली खोवे की पहचान के लिए खोवे को सीमित मात्रा में पानी मिलाकर उबाल लें। थोड़ी देर ठंडा होने के बाद आयोडीन का टिंचर मिलाएं। यदि खोवे का रंग नीला हो जाए तो समझिए कि खोआ नकली है।

नकली खोये से फूड प्वाइजनिंग का खतरा
डॉ. धर्मेंद्र शुक्ल कहते हैं कि मिलावटी खोवे में सिंथेटिक दूध का पाउडर और स्टार्च मिला होने से फूड प्वाइजनिंग का खतरा होता है। इसके अलावा दूध में यूरिया या फर्मलीन की मिलावट से गुर्दा व लीवर व आंखों के खराब होने की आशंका रहती है।

संयुक्त अभियान चलाने को राजी एआरएम
डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक भागीरथी सिंह कहते हैं कि रोडवेज के चालकों व परिचालकों से वाणिज्यिक वस्तुआें विशेषकर खाद्य पदार्थों की बुकिंग न करने की हिदायत दी गई है। अगर लाते हैं तो इसे बस की छत पर लादकर लाना होगा। इससे नकली व मिलावटी खाद्य पदार्थों के धूप में खराब होने की आशंका के चलते ऐसे पदार्थ की बुकिंग ही नहीं होगी। इसके अलावा किसी भी हाल में पांच कुंतल से अधिक माल लाने की मनाही है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी हमारे साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाएं तो ऐसे कारोबार पर और प्रभावी अंकुश लग सकेगा। इसमें हम पूरा सहयोग करने को तैयार हैं।

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