मिलों को क्षमता से अधिक धान देने पर होगी कार्रवाई

Basti Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
बस्ती। चावल मिलों से हो रहे सरकारी चावल के गबन को देखते हुए प्रशासन और विभाग ने इस बार मिलों को उनकी क्षमता के मुताबिक ही धान देने का निर्णय हुआ। अधिक धान देने वाले केंद्र प्रभारियों और जिला खाद्य विपणन अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि वर्ष 2011-12 की धान खरीद योजना में चावल मिलों को उनकी क्षमता से अधिक धान दे दिया गया था। जिन मिलों की क्षमता 20 दिन में पांच सौ कुंटल धान कूटने की नहीं थी, उन्हें पांच से दस हजार कुंटल धान की डिलिवरी की गई। नतीजे के तौर पर मिलों पर 2.90 लाख कुंटल चावल बकाया रह गया। धान खरीद का दूसरा सत्र शुरू हो गया है, मगर विभाग अब तक मिलों से बकाया चावल नहीं ले सका। चूंकि धान खरीद योजना में सरकारी धन लगा रहता है इसलिए इसके दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए प्रशासन और खाद्य विभाग ने धान देने के मामले में सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। कमिश्नर सुशील कुमार कहते हैं कि आरएफसी को इस बात के निर्देश दिए गए हैं कि क्षमता से अधिक किसी भी मिल को धान न दिया जाए। आदेश का पालन न करने वाले केंद्र प्रभारियों और जिला खाद्य विपणन अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।

118 में से 24 मिलों की ही हुआ एग्रीमेंट
जिले में धान कूटने के लिए विभाग ने 118 चावल मिलों से अनुबंध की तैयारी कर रहा है। इन सभी मिलों की क्षमता एक घंटे में 1130 कुंटल धान कूटने की है। यहां पर 0.75 एमटी से लेकर सात एमटी प्रति घंटा धान कूटने वाली मिलें स्थापित हैं। सबसे बड़ी राइस मिल इंडस्ट्रियल एरिया स्थित चौधरी फ्लोर राइस मिल है। इसकी क्षमता प्रति घंटा 70 कुंटल होने का दावा विभाग कर रहा है। वहीं सबसे कम क्षमता वाली शिवम राइस मिल मुस्तफाबाद व जायसवाल राइस मिल बड़ेरिया हैं। इन दोनों मिलों की क्षमता प्रति घंटा सात कुंटल धान कूटने की है। विभाग अब तक 24 मिलों से अनुबंध कर चुका है। डिप्टी आरएमओ ने बताया कि शासन ने इस बार वर्ष 2011-12 के बकाएदार मिलों से अनुबंध न करने का निर्णय लिया है।

20 दिन में चावल न देने पर अर्थ दंड
आरएफसी एके सिंह कहते हैं कि इस बार एक मिल को एक बार में कम से कम 500 कुंटल और अधिकतम 1500 कुंटल धान कूटने के लिए दिया जाएगा। मिलों ने अगर 20 दिन के भीतर दिए गए धान का चावल नहीं दिया तो उन्हें दूसरी लाट नहीं दी जाएगी। साथ ही मिलों से प्रति दिन के हिसाब से प्रति कुंटल पचास पैसा होल्डिंग चार्ज लिया जाएगा।

क्षमता से अधिक कर दिया अनुबंध
अधिक धान कूटने के चक्कर में कई मिलों ने क्षमता से अधिक अनुबंध करा लिया है। एक टन की क्षमता वाली मिलों का दो से चार टन की क्षमता का अनुबंध होना दिखाया गया है। मिलों की क्षमता का हर साल सत्यापन करने के उपरांत ही अनुबंध करने की व्यवस्था बनी है। सत्यापन करने की जिम्मेदारी केंद्र प्रभारी और जिलास्तरीय अधिकारी की रहती है।

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