बकरीद पर खुदा की इबादत में आज देंगे कुर्बानी

Basti Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। त्याग और बलिदान के पर्व ईद-उल-अजहा पर खुदा की इबादत में कुर्बानी के लिए देर रात तक बकरों की खरीद चलती रही। शनिवार को अकीदत के साथ अलग-अलग समय पर मस्जिदों में बकरीद की नमाज अदा की जाएगी।
कुर्बानी का असल अर्थ यहां ऐसे बलिदान से है जो दूसरों के लिए किया गया हो। जानवर की कुर्बानी तो एक प्रतीक भर है। मौलाना मोहम्मद राशित कहते हैं कि ईद-उल-अजहा का इतिहास हजरत इब्राहिम से जुड़ा है। वे कई हजार साल पहले इराक में पैदा हुए थे। अल्लाह तआला ने कई बार उनका इम्तिहान लिया। जब उनका इकलौता बेटा इस्माइल 11 साल का हुआ तो उन्होंने ख्वाब देखा कि कह रहा है कि अल्लाह की राह में कुर्बानी दो। उन्होंने अपने सबसे प्यारे ऊंट की कुर्बानी दी। फिर ख्वाब आया कि अपनी सबसे प्यारी वस्तु की कुर्बानी दो। उन्होंने अपने सारे जानवरों की कुर्बानी दे दी। तीसरी बार ख्वाब आया कि अल्लाह को उनके बेटे की कुर्बानी चाहिए। वह जरा भी नहीं हिचके। पत्नी हाजरा से बच्चे को नहलाकर तैयार करने को कहा। हालांकि उन्हें इबलीस (शैतान) ने बहकाने की बहुत कोशिश की। मगर वह नहीं माने। इसके बाद से ही खुदा की इबादत में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। शुक्रवार की देर रात तक अकीदतमंदों ने कुर्बानी के लिए बकरे खरीदे।

कुर्बानी से शुरू, कुर्बानी पर खत्म
इस्लाम कुर्बानी का नाम है। इस्लाम के मुताबिक साल का पहला महीना मोहर्रम का होता है। इसी महीने से इस्लामिक साल की शुरुआत होती है। यह कुर्बानी का महीना है। इस महीने इमाम हुसैन ने इंसानियत और इस्लाम की हिफाजत की खातिर जान की कुर्बानी दी थी। वहीं इस्लाम के आखिरी महीने ज़िल हिज के महीने में ईद-उल-अजहा में कुर्बानी दी जाती है। यानी इस्लामिक महीने कुर्बानी से शुरू होता है और कुर्बानी पर जाकर ही खत्म होता है।

पांच से 30 हजार तक के बकरे
बकरे के व्यापारी गुलशाद के मुताबिक, बाजार में पांच हजार से लगाए 30 हजार तक के बकरे हैं। उनके पास तीन बकरे हैं। जो नौ हजार से 11 हजार तक के हैं। शहर में नगर बाजार से बकरा बेचने आए अली हुसैन ने बताया कि उसके पास भी तीन बकरे हैं। इनमें से एक बकरा तो दस हजार का है। ओड़वारा से बकरा बेचने आए जियाउर्रहमान का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार बकरे के दाम बढ़ोतरी हुई है। साऊंघाट निवासी शहाबुद्दीन ने बताया कि वह पांच हजार का बकरा बेच चुके हैं। उनके पास अभी दस से बारह हजार के बकरे बचे हैं। बाजार में एक बकरा लेकर पहुंचे मुंडेरवा निवासी वसीम ने बताया कि उनका बकरा बारह हजार का है। महंगाई के चलते कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। व्यापारियों ने एक तो महंगे दामों में बकरी के बच्चे खरीदे। महंगा चारा खिलाया है, इसलिए अब उनको महंगे दाम पर बेच रहे हैं। कई क्षेत्रों में बकरों की मुंहमांगी कीमत भी मिल रही है। ऐसे में शहर में बकरों की कमी लाजमी है। शाकिर अली ने बताया कि उसने अपना बकरा 16 हजार रुपये में बेचा है। ऐसे ही सलमान ने सात हजार में अपना बकरा बेचा है।

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