शहर की सड़कों पर 13 हजार मोटर वाहन

Basti Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। अतिक्रमण के चलते शहर में वैसे भी सड़क ढूंढे नहीं मिलतीं। इसके बावजूद इन दिनों देवी पंडाल और पटरी पर सजी दुकानों से सड़कें अधिक सिकुड़ गई हैं। नतीजा पतली सड़क पर वाहनों की गुत्थमगुत्था से लोगों का टेंशन और भी बढ़ गया है। 24 घंटे दौड़ रहीं 13 हजार मोटर गाड़ियाें ने आवागमन दुरूह कर दिया है। बेशक आप जल्दी में हों, लेकिन साइड नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं, अगर उसे ओवर टेक करके निकलना चाहें तो कोई भरोसा नहीं कि कोई आटो कटिंग मारकर आपको डिवाइडर से भिड़ा देगा।
शहर में जाम की समस्या इसलिए नहीं है कि वाहनों की संख्या काफी अधिक है। बल्कि इसलिए है कि पुलिस और पब्लिक बेशऊर हैं। जानकारों का मानना है कि ट्रैफिक सेंस के अभाव में आम पब्लिक जहां मनमानी ड्राइव और पार्किंग करके खुद अपने पांव में कुल्हाड़ी मारती है तो पुलिस उन्हें मनमानी करने की खुली छूट दे रही होती है। पूरा शहर घूम डालिए, मगर यातायात पुलिस विरले ही नजर आएगी। रोडवेज तिराहे पर अगर कहीं नजर भी आ गए तो सिवाय आटो और थ्री ह्वीलर ड्राइवरों से ठिठोली के, व्यवस्था की डोर संभालते शायद ही नजर आएं।
परिवहन विभाग के आंकडे़ गवाह हैं कि शहर में सबसे अधिक 12 सौ आटो रिक्शा काफी तंग कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर आटो रेलवे स्टेशन से गांधीनगर होते कचहरी तक जाते हैं। मालवीय रोड और अस्पताल रोड पर भी तिपहिया दौड़ता दिखेगा, मगर इन रोड पर संख्या कम है। सवा लाख की आबादी वाले शहर में इतनी बड़ी संख्या में आटो चलते हैं तो दूसरा कोई वाहन नजर नहीं आते।

बीमारियों की जड़ है बेतहाशा चलते वाहन
दमा, एलर्जी, नजला ही नहीं टीबी आदि बीमारियों की सबसे बड़ी वजह वाहनों से हो रहा प्रदूषण है। 65 हार्ट्स कार्बन है। मगर यह इस मानक से 20-25 प्रतिशत अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों से कार्बन मोनोआक्साइड गैस निकलती है। दो पहिया वाहनों में इसका स्टैंडर्ड प्रतिशत 4.5 है। जबकि चार पहिया वाहनों में इसका प्रतिशत 3.0 होता है। लेकिन जांच में यह पांच से 10 प्रतिशत अधिक मिलता है। विभागीय अधिकारी यह तो मानते हैं कि टेंपो और ट्रक से सर्वाधिक प्रदूषण फैल रहा है। इस जहर को फैलाने में टेंपो और ट्रकों का सबसे ज्यादा योगदान है। जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डा. वीएस त्रिपाठी का कहना है कि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण से लोगों को दमा, एलर्जी, नजला ही नहीं ब्रांकाइटिस, सांस और टीबी आदि बीमारियां हो रही हैं। इससे रोजाना करीब सौ से अधिक मरीज डाक्टरों के पास आते हैं। इस खतरनाक जहर को फैलने से न रोका गया तो यह गंभीर रुख अख्तियार कर लेगा। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. केपी सिंह का कहना है कि प्रदूषण के कारण कंजक्टीवाइटिस और ड्राई आई सिंड्रोम हो जाते हैं। ये दोनों रोग भी आंखों के लिए बेहद गंभीर होते हैं।

खुद करें पहल तभी मिलेगी राहत
: अपने वाहनों को दुरुस्त रखें।
: समय से सर्विस कराएं
: आवागमन के लिए पर्याप्त जगह छोड़कर ही पार्क करें
: नाक मास्क या रुमाल से ढके रखें
: बेवजह एक्सिलेटर न बढ़ाएं।
: वाहनों का पीछा न करें।
: अगली गाड़ी के साइलेंसर से दूर रहें।

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