वायरल फीवर के बाद निमोनिया ने जकड़ा

Basti Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। बदलते मौसम की मार मासूमाें पर भारी पड़ रही है। वायरल फीवर के बाद अब निमोनिया के वार से इन दिनों सरकारी अस्पतालों से लेकर नर्सिंग होम और क्लीनिक मासूम मरीजों से पटे पड़े हैं।
अक्टूबर के दूसरे पखवारे में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। सुबह-शाम हल्की ठंड की दस्तक ने मासूमों को बेहाल कर रखा है। दिनचर्या में जरा सी असावधानी हुई नहीं कि बच्चे निमोनिया की चपेट में आ जा रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले 150 मासूमों में आधे से अधिक निमोनिया से पीड़ित हैं। वहीं चिल्ड्रेन वार्ड ऐसे मरीजों से पटा पड़ा है। वायरल फीवर के बाद मासूम निमोनिया की गिरफ्त में आ रहे हैं।
डॉक्टर मानते हैं कि इसके लिए कहीं न कहीं अभिभावकाें की लापरवाही भी जिम्मेदार है। दूध पिलाने वाली माताओं को अपने नौनिहालों को इस रोग से बचाने के लिए खुद की दिनचर्या में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। उनकी जरा सी लापरवाही मासूमों के लिए मुसीबत बन जा रही है। रोग की सर्वाधिक मार दो साल तक के बच्चाें पर पड़ है। हालांकि पांच साल तक के बच्चे भी पीड़ित हैं। जिला अस्पताल में चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती 10 माह की अंशिका, नौ माह का अल्तमस, चार माह का तुफैल, नौ माह का अर्पित, आठ माह का शिवम, तीन माह का सल्लू, मंगल बाजार निवासिनी मोहिनी के परिवार के नौ माह का मोहित और ढाई साल की बेटी कोमल, बभनान के जितेंद्र निषाद का आठ माह का बेटा अभिषेक को भर्ती किया गया है। ये सभी निमोनिया से पीड़ित हैं। यहां कुल भर्ती 60 मरीजों में से दो तिहाई निमोनिया के मरीज हैं।

क्या है रोग का लक्षण
बस्ती। निमोनिया के मरीजों में पसली तेज चलना, सांस लेने में दिक्कत, नाक और सीने में जकड़न, तेज बुखार आना, हर समय रोना-चिल्लाना, दूध पीने में अरुचि और रोग का असर बढ़ने पर हाथ और पैर में नीलापन दिखाई देता है।

बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह
बस्ती। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके गौड़ का कहना है इन दिनों मौसम के बदलाव के कारण तापमान में गिरावट आ रही है। सुबह-शाम ठंड का असर दिख रहा है। पांच साल तक के बच्चों को ठंड से बचाव के लिए गर्म या मोटे कपड़े पहनाएं। ठंडे पानी से स्नान की बजाए गुनगुने पानी से बच्चे को नहलाएं। इसके साथ ही दूध पिलाने वाली महिलाओं को दही, कोल्डड्रिंक, आइसक्रीम खाने से परहेज करें। इसके अलावा वे भी अपने को स्वस्थ रखने के लिए एहतियात बरतें। बच्चों के साथ जब भी बाहर निकलें उनके कान, नाक और सिर को अच्छी तरह जरूर ढक लेें। इसके बाद भी अगर बीमारी का लक्षण दिखे तो तत्काल किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में इलाज कराएं।

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