प्रमाणपत्र बनाने और रिपोर्ट लगाने के नाम पर मची लूट

Basti Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। आम नागरिकों की सुविधा के लिए तहसील में बनाई गई ‘एकल खिड़की’ धनउगाही का केंद्र बन गई है। जो सुविधा आम लोगों को नि:शुल्क मिलनी चाहिए, उसके लिए रिश्वत देनी पड़ रही है। आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र बनाने और रिपोर्ट लगाने तक में मनमानी की जा रही है। 30 से 50 किलोमीटर दूर से चलकर फीडिंग कराने आने वाले लोगों को काफी परेशान होना पड़ रहा है। इनका कहना है कि बिना रुपये दिए कोई काम नहीं होता। परेशान लोगों की मानें तो एक प्रमाणपत्र बनाने और फीडिंग कराने में पांच सौ से एक हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। मामला अगर कहीं जल्दी का रहा तो कीमत दोगुनी हो जाती है। इस सच का सामना ‘अमर उजाला’ टीम को एकल खिड़की की पड़ताल के समय हुआ।

कंप्यूटर फीडिंग के नाम पर धांधली का खेल
कलेक्ट्रेट परिसर एकल खिड़की में फीडिंग के लिए हर्रैया से आए रामक्लेश कहते हैं कि पहले तो आय प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर राजस्व कर्मचारियों को पांच सौ रुपये देने पड़े। बताया गया था कि जिस खिड़की पर प्रमाणपत्र मिलेगा, वहीं पर फीडिंग भी होगी। जब फीडिंग कराने के लिए एकल खिड़की पर गए तो बताया कि फीडिंग मुख्यालय पर होगी। यहां जब आए तो फीडिंग के लिए धन की मांग की गई। जब मांग की पूर्ति नहीं की तो भगा दिया गया। इसकी शिकायत जब सीआरओ से की गई तो कहा गया कि जांच कराई जाएगी। यहीं से आए बनवारी लाल ने बताया कि तहसील वालों ने यहां भेज दिया। बताया कि 30 रुपये जब दिया तो आय प्रमाणपत्र फीडिंग हो पाई। कहा कि लोग आम लोगों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। आखिर एक आम आदमी जाए तो कहां जाए। बताया कि रुपये लेने की शिकायत जब अफसरों से की गई तो जवाब मिला कि किसने धन देने को कहा था। हर्रैया से आए दुर्गा प्रसाद ने सरकारी व्यवस्था को कोसते हुए कहा कि सब जगह लूट मची है। कोई देखने वाला नहीं है। खुलेआम खिड़की से धन लिया रहा है। कहा कि ऐसा लगता है कि इस लूट में सभी लोग शामिल हैं। हर्रैया तहसील के सर्रैया तिवारी से आए अली अहमद ने बताया कि गरीबों को सुविधा देने का सरकारी दावा कोरा कागज से अधिक कुछ भी नहीं है। फीडिंग और प्रमाणपत्रों के बनाने के नाम पर जिस तरह खुलेआम धन की मांग की जाती है, उसे देखकर यह नहीं लगता कि यहां पर शासन और प्रशासन का राज है। 50 किलोमीटर दूर जनपद गोंडा के बार्डर के ग्राम नरायनपुर से आय और जाति प्रमाणपत्र की फीडिंग कराने आए ओंकार पांडेय ने बताया कि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जितना धन और समय नहीं लगा उससे अधिक इतने दूर से आने में खर्च हुआ। इसी तरह का दर्द अन्य पीड़ितों का भी रहा।

धरना-प्रदर्शन पर भी नहीं खुली आंख
बस्ती। एक महीना पहले कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एकल खिड़की से फीडिंग के नाम पर सुविधा शुल्क को लेकर लगभग दो दर्जन पीड़ितों ने सीआरओ के सामने धरना-प्रदर्शन किया था। उस दौरान कार्रवाई के लिए लिखित में देने को कहा गया। पीड़ितों ने लिखकर धन लेने की शिकायत भी की। जांच का भरोसा भी अफसरों ने किया। मगर अब तक न तो जांच की गई और न कार्रवाई हुई। एकल खिड़की को बंद जरूर कर दिया गया। मगर दूसरे एकल खिड़की पर वसूली जारी रही।

नहीं मिली लिखित शिकायत : सीआरओ
बस्ती। एकल खिड़की से प्रमाणपत्रों की फीडिंग के नाम पर हो रही वसूली के बाबत सीआरओ देवीदास ने बताया कि अब तक किसी ने लिखित में शिकायत नहीं की है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। जब उनसे यह पूछा गया कि फीडिंग के लिए मुख्यालय पर क्यों भेजा जा रहा तो उन्होंने कहा कि यह गलत है। बताया कि आम लोगों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए सरकार ने सारी सुविधा एक ही खिड़की पर देने की व्यवस्था बनाई है। बताया कि जिस तहसील से प्रमाणपत्र जारी होगा, उसी तहसील में फीडिंग भी होगी। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो चेक कराया जाएगा।

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