कितनी रातें भूखे कटीं याद नहीं

Basti Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। खाद कारखाना से बमुश्किल आधा किलोमीटर दूर मिर्जापुर गांव में झोपड़ीनुमा आवास में अपने कुनबे को लेकर रह रहे जवाहर लाल की पीड़ा सुनकर किसी के भी आंखों भर आएंगी। 1986 में फर्टिलाइजर के वीआईपी गेस्ट हाउस में नियुक्ति के समय सोचा भी नहीं था कि मासूम बच्चों के साथ कभी भूखों सोना पड़ेगा। 1992 में कारखाना बंद होने के बाद वेतन कम हो गया लेकिन पेट भरता रहा। नौकरी मिलने के दस साल पहले ही पिता चल बसे थे। 2002 में नौकरी गई तो जिंदगी लावारिशों जैसी हो गई।
जवाहर लाल के पिता खाद कारखाना में सुपरवाइजर थे। 1976 में एक सड़क दुर्घटना में जब उनकी मौत हुई तो उस समय जवाहर बारह साल के थे। नौकरी करने के योग्य हुए तो पिता की जगह पर नौकरी मिली। नौकरी मिलने के बाद लगा कि जीवन फिर से पटरी पर आ जाएगा। 26 साल तक फर्टिलाइजर में नौकरी करने के बाद दिसंबर 2002 में नौकरी चली गई। जिस समय नौकरी गई उस समय जवाहर के ऊपर दो बेटियां मनीषा, मोना व मां श्याम सुंदर देवी की जिम्मेदारी थी। दोनो क्रमश: कक्षा पांच व तीन में थीं।
बकौल जवाहर लाल, पिता की मौत और मेरी नौकरी जाने के बाद मां डिप्रेशन में चली गई थीं। नौकरी जाने के बाद कारखाना का क्वार्टर छोड़ना पड़ा। बच्चों की पढ़ाई और मां के इलाज के लिए लोगों के घरों में मजदूरी शुरू की लेकिन यह बहुत कम था। इलाज के अभाव में 2005 में मां भी साथ छोड़ गई। नौकरी व पिता का साथ पहले ही छूट चुका था। लगा कि पूरी दुनिया उजड़ गई। महराजगंज के सुमेरगढ़ में कुछ पुस्तैनी जमीन थी। उसे बेंचकर मिर्जापुर में थोड़ी सी जमीन ली और वहां पर मकान बनवाया। रहने की व्यवस्था हो गई लेकिन रोटी का संकट सामने आ गया। कई रात भूखों सोना पड़ा। अपने भूखे सोने का दुख नहीं है लेकिन जब बच्चियों के रोटी की व्यवस्था न कर पाने की टीस जिन्दगी भर रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को टिफिन पहुंचाकर और मजदूरी करके बड़ी लड़की मनीषा को इंटर तक पढ़ाया। इसके बाद गांव की बची जमीन बेंचकर बीटेक में उसका एडमीशन करवाया। अब वह लखनऊ में बीटेक कर रही है। छोटी बेटी इस समय इंटर कर रही है। इसकी आगे की पढ़ाई कैसे होगी यह सोचकर परेशान हो जाता हूं।


उदास चेहरों पर मुस्कान बिखेरेंगे शशि प्रकाश (फोटो)
गोरखपुर। अमर उजाला में ‘उदास चेहरों की दास्तां’ पढ़कर बीर अब्दुल हमीद स्मारक महाविद्यालय फत्तेपुर के संरक्षक शशि प्रकाश श्रीवास्तव बुधवार को अमर उजाला दफ्तर पहुंच गए। उन्होंने दुलारी देवी की मदद की पेशकश की। खाद कारखाना में रह रहे दो सौ परिवारों की दुर्दशा की जानकारी उन्हें मिली तो उन्होंने कहा कि पैसों के अभाव में एक भी विद्यार्थी की पढ़ाई नहीं रुकेगी और कारखाना परिसर में जितने भी परिवार रह रहे हैं उनके बच्चों को बीर अब्दुल हमीद स्मारक महाविद्यालय में नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वे गुरुवार को दुलारी देवी के घर जाएंगे और उनकी समस्या को देखकर और तरह की मदद करेंगे। गुरु कृपा संस्थान के बृजेश त्रिपाठी ने भी दुलारी देवी की मदद की बात कही है। बृजेश ने कहा कि यदि गुरु कृपा संस्थान दुलारी देवी की आंखों का आपरेशन का खर्च उठाएगा।

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