रोज-रोज के जाम से शहर के लोग हलकान

Basti Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। शहर के जाम से लोग हलकान हैं। अक्सर स्कूल, ऑफिस, दुकान और अन्य काम पर लोग देरी से पहुंच रहे हैं। लेट होने के कारण लोग तनाव के भी शिकार हो रहे हैं। यातायात प्रशासन लोगों को जाम से निजात दिलाने में विफल है। इसकी वजह से दिनोंदिन शहरी हालात गंभीर होते जा रहे हैं। हर कोई जाम से निजात का मुकम्मल इंतजाम चाहता है।
एपीएन कालेज में पढ़ने वाले गौरव अक्सर लेट हो जाते हैं। घर से 15-20 मिनट पहले निकलते हैं, पर बिरले दिन ही हाजिरी लग पाती है। क्लास में देर की वजह जाम बताने पर पहले सभी सहपाठी हंसते थे पर अब आधे से अधिक खुद लेटलतीफी के शिकार हैं। यही हाल कलेक्ट्रेट के लिपिक रामधारी का है। अक्सर जाम से लेट हो जाते हैं। ऐसे न जाने कितने छात्र, कर्मचारी, मरीज जाम में फंसकर मुसीबत में पड़ते हैं। सबकी नजर में यह बेहद गंभीर विषय है।
शनिवार को जाम में फंसे आईटी कंपनी के कर्मचारी विनय नाहर ने बताया कि यह तो रोज-रोज का खेल हो गया है। लोग उल्टे-सीधे साइड से गाड़ी घुसा देते हैं। इससे जाम लग रहा है। उनके बगल में खडे़ दवा व्यवसायी श्याम मूरत मिश्रा बोल पडे़ कि आखिर लोग जाएं तो कहां जाएं? शहर में कुल मिलाकर दो ही रोड है। एक गांधीनगर मेन मार्केट से होकर तो दूसरा मालवीय रोड। इसके अलावा पुरानी बस्ती में भी स्टेशन रोड और राजा बाजार रोड। इसके बावजूद सभी रोड की पटरियां कब्जा कर ली गई हैं। एपीएन कालेज के शिक्षक विशाल सिंह गांधीनगर में खरीददारी करने पहुंचे। जाम की समस्या के सवाल पर भड़क उठे बोले कि इसका कोई इलाज नहीं है। सरकारी अफसर और नेता बड़ी-बड़ी गाड़ियां रोड पर खड़ी कर देते हैं। उन्हें रोड से कोई नहीं हटवाता भले ही दोनोें ओर जाम लग जाए। केवल बडे़ लोग रोड छोड़कर गाड़ी खड़ी करें तो गांधीनगर में जाम की समस्या आधी हो जाए। एपीएन कालेज से लौटे आदित्य तिवारी का कहना है कि बेतरतीब पार्किंग जाम की सबसे बड़ी वजह है। वहीं के छात्र रहमान सिद्दीकी का कहना है कि शहर के कई दुकानदार खुद अपनी दुकान के सामने ठेला और गुमटी रखवाए हैं। इससे पैदल चलने वालों के लिए भी जगह नहीं बचती। व्यवसायी रामजी बरनवाल शहर में नये स्टैंड बनाने पर जोर देते हैं।
जाम ने ले ली घायल की जान
बात 19 जुलाई की है। बखिरा निवासी नजीर अहमद हाईवे पर बाइक से गिरकर घायल हो गए। पुलिस की मदद से उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। मगर हेडइंजरी और अधिक खून बह जाने की वजह से डाक्टरों ने लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। मरीज लेकर जा रही एंबुलेंस कटरा पानी की टंकी के पास जाम में फंस गई। इमरजेंसी सायरन बजाने के बावजूद करीब आधे घंटे बाद उसे रास्ता मिल पाया। उनके बडे़ भाई वजीर अहमद के मुताबिक ट्रामा सेंटर के डाक्टर बोले कि दस मिनट पहले लाए होते तो जान बच गई होती।
‘ट्रिपल पी’ से होगा समाधान
जाम की समस्या बेहद गंभीर है, यह बात कमोबेश सभी मानते हैं। सबका एक स्वर से यह भी कहना है कि बिना सामूहिक प्रयास के इस समस्या का निदान संभव नहीं है। सबने माना कि इसके लिए ‘ट्रिपल पी’ यानी पुलिस, प्रशासन और पब्लिक को साझा अभियान चलाना होगा।
पुलिस/प्रशासन के प्रयास में निरंतरता नहीं
ऐसा नहीं है कि पुलिस और प्रशासन ने जाम से मुक्ति के प्रयास नहीं किए। पर उनके अभियान में कभी निरंतरता नहीं आई। चाहे वह अतिक्रमण हटाने की बात हो या ट्रैफिक डायवर्जन का मसला। पेशे से अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह के मुताबिक पुलिस और प्रशासन की प्रतिबद्धता सबसे जरूरी है। इसके लिए शुरू किया गया अभियान कभी पूरा नहीं हो सका। एक दो दिन में ही कवायद फुस्स हो गई।
छोटे से जिले में 25 हजार मोटर-गाड़ी
किसी अन्य क्षेत्र में भले ही जिले का नाम प्रमुखता से न लिया जाता हो पर जाम की समस्या में अपना जनपद अव्वल है। बमुश्किल 24 लाख आबादी पर 25 हजार से अधिक मोटर-गाड़ी लोगों के पास है। इनमें से आधे भी जिला मुख्यालय की सड़कों पर दाखिल हो जाएं तो शहर कराहने लगे। ट्रैफिक विभाग के अनुमानत: करीब 40 फीसदी गाड़ियां रोजाना शहर में आती-जाती हैं। इस पर भी जाम की स्थिति बदतर है।
बनाए जाएंगे नये स्टैंड
जाम के झाम से मुक्ति न मिलने की बड़ी वजह है गलत पार्किंग। एसपी एमडी कर्णधार के मुताबिक जगह न होने की वजह से लोग रोड की पटरी पर गाड़ी पार्क करते हैं। अगर कहीं स्टैंड हो तो इससे दो फायदे होंगे। पहला यह कि जाम की समस्या कम होगी और दूसरे बाइक चोरी की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। बकौल एसपी नये स्टैंड के लिए नगर पालिका प्रशासन से संपर्क कर प्रयास किया जा रहा है।

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