हरितालिका तीज कल

Basti Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
बस्ती। धर्मानुसार हरितालिका तीज माता पार्वती की तिथि है। इस व्रत को करने से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। साथ ही सुहागिनों को सौभाग्य में वृद्धि होती है। ऊं नम: शिवाय का जाप करें।
ज्योतिषाचार्य पंडित जय प्रकाश द्विवेदी के मुताबिक योगज्योतिष गणना के अनुसार हरितालिका तीज में हस्त नक्षत्र का विशेष महत्व है। मगर इस बार चित्रा नक्षत्र में हरितालिका तीज पड़ रही है। त्योहार को लेकर महिलाओं ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

सजना है उन्हें, सजना के लिए....
बस्ती। तीज की तैयारियों को लेकर बाजार के ब्यूटी पार्लर पट रहे हैं। खासतौर से नेट, जार्जेट, टीशू की साड़ियां, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और नए रेंज के सौंदर्य प्रसाधनों की जबरदस्त मांग है। अलग-अलग तरह की मेहंदी लगाने का भी खूब क्रेज दिख रहा है।
सुहागिन महिलाओं का यह सबसे खस त्योहार होता है। इसमें महिलाएं निराजल व्रत रखती हैं। इस दिन वे सोलह शृंगार करती हैं। यही वजह है कि ब्यूटी पार्लर में फेशियल, मसाज, थ्रेडिंग से लेकर हेयर कटिंग के लिए महिलाओं की भीड़ लगी है। मेहंदी लगवाने के लिए भी बुकिं ग हुई है। इस बार पारंपरिक और फोक डिजाइन की मेंहदी लगवाने के प्रति महिलाओं की अधिक रुझान है। टैटू मेहंदी भी खास पसंद बनी हुई है। ब्यूटी पार्लर संचालिका रुचिका के मुताबिक कांटीनेंटल मेंहदी अरबियन शैली जैसी है। लेकिन फ्यूजन टच देने के लिए शिमर और ग्लिटर से हथेलियों को सजाया जाता है। इस बार नेट जार्जेट, टीशू की साड़ियों खूब पसंद की जा रही हैं। वहीं साड़ियों से मैचिंग ज्वेलरी और चूड़ियों की तलाश करते महिलाएं देखी गईं।


हरितालिका तीज का महात्म्य
भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया को इस व्रत को सुहागन तथा कुंवारी कन्याओं को भी करने का विधान है। पुराणों के माध्यम से सबसे पहले माता पार्वती जी ने भगवान शिव जी को वर के रूप में पाने के लिए इस व्रत का पालन किया था। उनके पिता माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। परंतु पार्वती जी मन में भगवान शिव को पति के रूप में वरण किया। पिता के कठोर निर्णय को देखकर पार्वती जी की सखियों ने हरण करके जंगल में ले जा कर शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए भादो शुक्लतीज के दिन तप कराया। इसलिए इस व्रत को हरितालिका कहते हैं। हरत+आलिका...! हरत का अर्थ हुआ भगाने से और आलिका का अर्थ हुआ सखियों से। माता पार्वती जी अपने तप से भगवान शिव को प्रसन्न करके उनकी अर्धंागिनी हुई।

व्रत को करने का नियम
बस्ती। सुबह नित्य क्रियादि से निवृत्त होकर मकान को साफ करके उमा महेश्वर की प्रतिमा रखकर पीलेवस्त्र को धारण करके सच्चे मन से भगवान शिव और माता पार्वती साथ में गणेश जी को घी का दीपक, अगरबत्ती, मीठा, फूल-फल आदि से पूजा करके पूरा दिन निर्जला (बिना जल पीए) निष्ठा पूर्वक व्रत करना चाहिए। शाम को शिव मंदिर या घर पर ही सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी सामग्री सजाकर रखें। इन वस्तुओं को माता पार्वती जी को अर्पित करें। उसके बाद सभी वस्तु को ब्राह्मण को दान कर दें। इस प्रकार पार्वती और शिव का पूजन आराधना कर कथा सुनें।

तीज के दिन का पंचांग

सूर्योदय 05.49.37
सूर्यास्त 17.56.16
चंद्र दर्शन 07.56.16
चंद्रास्त 19.25.49
तिथि तृतीया 23.57.28
नक्षत्र चित्रा 21.25.43
योग ब्रम्ह 13.01.16
अभिजीत मुहूर्त 11.28.43 से
12.17.10 तक

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