खुद डूबने से बचे तो बन गए तैराकी के उस्ताद

Basti Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
बस्ती। यमुना में डूबने से बच क्या गए, लहरों से जैसे यारी हो गई। उस वक्त फरिश्ते की तरह बचाने पहुंचे हजारी निषाद को गुरु मानकर उन्हीं की निगहबानी में रियाज करना शुरू कर दिया। कुछ ही महीनों में सोनी ‘सोना’ जैसे चमक उठे। वह ऐसे तैराक बन गए कि हाथ-पांव रस्सी से जकड़ भी दिया जाए तो सुरेश बाबू सोनी को बड़ी नदी पर करने में देर नहीं लगती। आज सोनी नायाब तैराक बनकर लिम्का बुक आफ रिकार्ड्स में अपना कारनामा दर्ज करा चुके हैं। उन्हें मलाल है कि उनके महकमे ने कभी इस दुर्लभ विधा की कद्र नहीं की। रियाज करने के लिए वक्त न मिलने से पांव में बेड़ियां पड़ गई हैं। वरना सोनी की दिली तमन्ना है कि वह देश के लिए उच्च कोटि के तैराकों की फौज तैयार करें।
इलाहाबाद के मूल निवासी सुरेश बाबू सोनी का कारनामा न केवल दंग कर देने वाला है, बल्कि हैरतंगेज भी। उनके पूरे शरीर को रस्सियों से जकड़ दिया जाए, फिर कैनवस के बोरे में भरकर फिर से कसकर बांध दिया जाए फिर भी वह किसी भी नदी को तैरकर पार कर सकते हैं। ऐसा कारनामा वह वाराणसी के दशासुमेर घाट पर गंगा में कई बार कर चुके हैं। 1998 में इलाहाबाद के तत्कालीन डीएम प्रभात चंद्र चतुर्वेदी की मौजूदगी में पहली बार यमुना नदी को आर-पार किया था। इसके बाद तो सिलसिला ही चल पड़ा। जुलाई 2007 में जी टीवी के ‘शाबास इंडिया’ लाइव शो प्रसारित हाने के बाद 2009 में सोनी ने लिम्का बुक आफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने की दावेदारी ठोंकी। संस्था की ओर से चयन कमेटी ने भी अपने सामने शो कराया था। मौजूदा समय में एसपी के स्टेनो पद पर तैनात सोनी कहते हैं कि वह खुद नहीं जानते थे कि उनमें कोई खास प्रतिभा है। 1987 में इलाहाबाद में यमुना में नहाते समय डूबने लगे। तभी अचानक फरिश्ते की तरह तैराकी के उस्ताद हजारी निषाद पहुंच गए। अपने फन के मास्टर हजारी ने सोनी को न केवल डूबने से बचाया, बल्कि उस प्रतिभा को भी भांप गए, जो कहीं छिपी हुई थी। अगले ही दिन से शुरू हो गई हीरे को तराशने की प्रक्रिया। 2002 में यूपी पुलिस की ओर से तैराकी प्रतियोगिता में सोनी ने प्रदेश टाप किया। इससे गद्गद होकर तत्कालीन डीजीपी आरके पंडित ने न केवल नकद इनाम दिया, बल्कि सम्मानित भी किया। सुरेश बाबू में जादू दिखाने का हुनर है। वह भजन गायकी के भी शौकीन हैं। इन दोनाें विधाओं का भी शो वह कर चुके हैं। उनका दावा है कि पांच साल से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक को एक हफ्ते के भीतर तैराकी सिखा सकते हैं। वह चाहते हैं कि उन्हें सुविधा दी जाए। ताकि आने वाली पीढ़ी को हुनर की इस थाती को सौंपा जा सके।

क्या है सोनी का कारनामा
सुरेश बाबू सोनी पहले अपने हाथ-पैर को रस्सियों से बंधवाते हैं। पूरी शरीर जकड़कर बांधने के बाद कैनवस के बोरे में भरवाते हैं। बोरे का मुंह गर्दन पर कसा होता है। इसके बाद फिर रस्सियों से उन्हें जकड़ा जाता है। फिर कुछ लोग नाव में लादकर गहरे पानी में ले जाकर डाल देते हैं। सोनी बिना किसी दिखने वाली हरकत के पूरी रफ्तार से पानी चीरते निकलते रहते हैं। गंगा-यमुना जैसी गहरी और चौड़ी नदियों को कई बार आर-पार किया है।

इंटरनेट पर भी उपलब्ध है क्लिप
सोनी का लाइव कारनामा इंटरनेट पर भी देखा जा सकता है। गूगल पर सुरेश बाबू सोनी टाइप करते ही पूरी साइट खुल जाती है।

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