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‘रबर स्टैंप’ नहीं ले पाएंगे बैठक में हिस्सा

Basti Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के साथ उनके संबंधियों के कार्यालय में प्रवेश करने पर रोक लगाई जाएगी। अब उनके प्रतिनिधि के तौर पर कोई रबड़ स्टैंप बैठकों में शामिल नहीं होंगे। लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद शासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
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पंचायती राज विभाग की त्रिस्तरीय व्यवस्था के तहत आरक्षण के जरिए चुनकर आई अधिकतर महिला सदस्य बैठकों में नहीं आती हैं। उनकी जगह पति या परिवार के अन्य लोग जनप्रतिनिधि ने रूप में विकास योजनाओं में भाग लेते हैं। शासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि संबंधियों की ओर से बैठकों में फर्जी हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। बताया गया कि महिला सदस्यों की जगह उनके प्रतिनिधि बैठकों में शामिल होते हैं। वहीं कार्यों का संचालन करते हैं। ऐसी शिकायतों को लेकर पंचायतीराज विभाग ने अब कडे़ फरमान जारी किए हैं। हालांकि 10 मार्च 1998 को ही शासन ने इस तरह के निर्देश जारी किया था मगर, उस पर अमल अब तक नहीं हो सका है। इस बार शासन ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। जिला पंचायत अध्यक्ष लता देवी के साथ ही जिले के 14 ब्लाक में से छह पर महिला प्रमुख विराजमान हैं। लता देवी तो हर बैठक में नजर आती हैं मगर, अधिकतर महिलाओं के प्रतिनिधि ही बैठक में भागीदारी निभाते हैं। प्रमुख सचिव बीएम मीना ने इस मामले में सख्ती बरती है। उन्होंने कमिश्नर और डीएम को सात बिंदुओं पर निर्देशित किया है।

: महिला निर्वाचित पदाधिकारियों के साथ उनके संबंधी संबंधित आफिस में प्रवेश नहीं करेंगे।
: ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की बैठक में शामिल नहीं होंगे।
: बैठक से पूर्व डीएम, सीडीओ और डीपीआरओ को सूचना दी जाएगी।
: जिला पंचायत की बैठक में अध्यक्ष और सदस्य के अलावा कोई अन्य सदस्य भाग नहीं लेगा।
: महिला सदस्य का कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल होता है तो डीएम को सूचना दी जाएगी।
: क्षेत्र पंचायत की बैठक में प्रतिनिधि की जगह कोई बल पूर्वक शामिल हो तो सीडीओ को अवगत कराना होगा।

अधिकारियों के भ्रमण पर रहना होगा मौजूद
अक्सर देखा जाता है कि अधिकारियों की ओर से पंचायतों के भ्रमण के दौरान महिला जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं रहती हैं। उनके पुरुष संबंधियों की ओर से अधिकारियों का निरीक्षण ऐसे कराया जाता है मानो वही अध्यक्ष, प्रमुख या फिर ग्राम प्रधान हों। प्रमुख सचिव ने इस पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

बैठकों की होगी वीडियोग्राफी
महिला प्रतिनिधियों की जांच के लिए जिला प्रशासन की ओर से बैठकों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसका सुबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की बैठकों में हर हाल में वीडियोग्राफी कराए जाने हैं। इससे पता चल सकेगा कि किस महिला प्रतिनिधि के सगे संबंधी बैठक में शामिल हुए।

जिले में महिला प्रमुख और उनके प्रतिनिधि
ब्लाक प्रमुख प्र्रतिनिधि
परशुरामपुर कमला परमहंस
सांऊघाट पार्वती विश्वनाथ
दुबौलिया मंजू गौतम संजय कुमार
बनकटी नीलम सिंह रघुनाथ सिंह
कुदरहा सीता सिंह आसमान सिंह
सल्टौआ ममता विश्वनाथ जायसवाल

किसी ने सराहा तो कई ने बताई समस्याएं
बनकटी के प्रमुख प्रतिनिधि रघुनाथ सिंह कहते हैं कि शासनादेश का मुझे पहले पता चल गया था, इसलिए मैं एमएलसी मनीष जायसवाल का प्रतिनिधि बन गया। वहीं दुबौलिया प्रमुख के प्रतिनिधि संजय कुमार कहते हैं कि शासन के रुख से दिक्कतें तो होंगी ही। प्रमुख संघ के जिला महामंत्री गुलाब सोनकर की माने तो शासन के निर्देश अच्छे भी हैं और दिक्कतों वाला भी है। क्योंकि आरक्षण के चलते चुनी गई अधिकांश महिलाएं बैठकों में प्रतिनिधियों के सवाल का जवाब तक नहीं दे पाएंगी। अब उन्हें चौका चूल्हे से बाहर आना होगा।

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